‘योग और इस्लाम’ ने लगवाया ‘बखेड़ासन’
योग एक बार फिर विवादों से जुड़ गया है। नया बखेड़ा ‘योग और इस्लाम’ नाम की किताब से खड़ा हुआ है। किताब में अलिफ, लाम, मीम का मतलब ओउम् बताया गया है, जिस पर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने ऐतराज जताया है।
इसके अलावा किताब में योग के बिना नमाज की कबूलियत पर ही सवाल खड़े किए जाने पर भी उन्होंने कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। किताब संघ से जुड़े संगठन ‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’ ने जारी की है।
योग दिवस से ठीक दो दिन पहले आरएसएस से जुड़े संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने योग और इस्लाम नाम से किताब जारी की है। किताब में शामिल तमाम जानकारियों को डॉ. इमरान चौधरी और अभिजीत सिंह ने संकलित किया है।
'योग के बिना नमाज की कबूलियत संभव नहीं'
किताब की परामर्श समिति में पद्मश्री प्रो. अख्तर उल वासे भी शामिल हैं। किताब के पेज नंबर 29 और 30 पर अलिफ, लाम और मीम का साफ-साफ मतलब ओउम् बताया गया है, जबकि मुस्लिम बुद्धिजीवियों का कहना है कि कुरान में इनके मायने नहीं बताए गए हैं।
साथ ही पेज नंबर नौ पर तो यहां तक कहा गया है कि योग के बिना नमाज की कबूलियत संभव नहीं है। योग और नमाज के बीच सिर्फ नाम का अंतर बताया गया है।
ओशो रजनीश के हवाले से पैगंबर मोहम्मद साहब को महान योगी बताया गया है। हिरा नाम की पहाड़ी पर जाकर ध्यान लगाने की भी बात कही गई है। सूफी परंपरा में सांस लेने के तरीके को भी योग से जोड़कर बताया गया है।
'गलत जोड़ा है किताब से मेरा नाम'
‘योग और इस्लाम’ किताब के विवादों में आते ही पद्मश्री से विभूषित नेशनल कमिश्नर मॉइनोरिटिज फॉर लिंगयूस्टिक इन इंडिया प्रो. अख्तर उल वासे का कहना है कि इस किताब के संबंध में उन्होंने किसी भी तरह से खुद का नाम इस्तेमाल किए जाने की अनुमति नहीं दी है।
क्या है मुस्लिम राष्ट्रीय मंच
24 दिसंबर 2002 को दिल्ली में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का गठन हुआ था। अजमेर बम ब्लास्ट में नाम आने से सुर्खियों में आए इंद्रेश कुमार मंच के मार्गदर्शक हैं। मंच से 25 राज्यों के मुस्लिम जुड़े हुए हैं।
'कुरान शरीफ में अलिफ, लाम और मीम का जिक्र कई जगह आया है, लेकिन कहीं भी इसके मायने नहीं बताए गए हैं। कुरान शरीफ नाजिल हुई है। तो फिर कोई आम इंसान इसका मतलब कैसे बता सकता है।'
- प्रो.रजाउल्लाह खान, चेयरमेन एकेडमी आफ कुरान एंड सीरत
'हर मजहब में कुछ न कुछ समानताएं जरूर होती हैं। लेकिन यहां तो कुछ लोग जबरन योग को इस्लाम पर थोपने की कोशिश कर रहे हैं, जो गलत है। बेवजह लोगों की भावनाओं को भड़काया जा रहा है।'
- अब्दुल्ला अज्जाम, पूर्व अध्यक्ष एएमयू छात्रसंघ
'योग के समर्थन में 46 मुस्लिम देश अपनी सहमति दे चुके हैं। योग किसी एक मजहब का नहीं है। सूर्य नमस्कार किसी पर थोपा नहीं जाना चाहिए। हर धर्म का इंसान अपनी सहूलियत के हिसाब से शब्दों का इस्तेमाल कर सकता है।'
- इस्लाम अब्बास सह प्रभारी मुस्लिम राष्ट्रीय मंच उप्र-उत्तराखंड
'योग को सेहत से जोड़कर करने पर हमें कोई ऐतराज नहीं है, यदि धर्म से जोड़कर योग कराया जाएगा तो कोई मुसलमान नहीं करेगा। अलिफ, लाम, मीम के मायने ओउम् बताने वाले स्वामी रामतीर्थ जी के बयान को आधा अधूरा और तोड़मरोड़ कर पेश कर रहे हैं।'
- डॉ. मुफ्ती जाहिद अली खान, पूर्व चेयरमैन सुन्नी थियोलॉजी विभाग एएमयू