..आखिर मिशेल के दुपट्टे की चिंता किसे है!
मीडिया में आई कुछ खबरों की मानें तो अमेरिका की प्रथम महिला मिशेल ओबामा के सिर पर स्कार्फ न रखने पर सऊदी अरब में सोशल मीडिया पर काफी विवाद हुआ है लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहते हैं।
सोशल मीडिया पर चल रहे "मिशेल ओबामा विथ नो हेडस्कार्फ" अरबी हैशटैग का 2,500 बार प्रयोग किया गया। यह संख्या बहुत छोटी नहीं है लेकिन जिस देश
में ट्विटर बेहद लोकप्रिय है वहाँ यह बहुत ज्यादा भी नहीं। यह भी ध्यान देने की बात है कि इस हैशटैग का प्रयोग करने वालों में 37 प्रतिशत ही सऊदी अरब के थे। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और मिशेल ओबामा सऊदी अरब के पूर्व सुल्तान शाह अब्दुल्लाह को श्रद्धांजलि देने गए थे।
बराक ओबामा से जुड़ा सलमान का टैग
मिशेल के हेडस्कार्फ से ज्यादा विवाद एक दूसरे टैग से शुरू हुआ जो अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से जुड़ा था। सऊदी अरब के लोगों ने अपने नए सुल्तान सलमान से जुड़े टैग "किंग सलमान लीव्स ओबामा टू प्रे" को ज्यादा तवज्जो दी।
"किंग सलमान लीव्स ओबामा टू प्रे" टैग को एक लाख 70 हज़ार से अधिक बार ट्वीट किया गया। सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ सऊदी अरब के नए सुल्तान हैं। एक सऊदी व्यक्ति ने ट्वीट किया, "ये वो इंसान है जो दुनिया के सबसे अहम देश के नेता को शोकसभा के बीच में ही छोड़ गया। "
रूढ़िवादी परंपराओं की आलोचना को हैशटैग
सोशल मीडिया पर 'मिशेल ओबामा विथ नो हेडस्कार्फ' हैशटैग को ज्यादातर इस्तेमाल सऊदी अरब की रूढ़िवादी परंपराओं की आलोचना के लिए किया गया है।
मिशेल के सिर नहीं ढकने को लेकर नाराज होने वाले लोगों की तादाद कम रही। कुछ लोगों ने मिशेल ओबामा की 2010 के मलेशिया दौरे की तस्वीर शेयर की जिसमें उन्होंने सिर पर स्कॉर्फ पहना हुआ है। कई अमरीकियों ने भी ट्वीट कर के सऊदी अरब में महिलाओं के सिर ढकने की परंपरा पर सवाल उठाए।