केन्द्र के आर्थिक एजेंडे का रथ रोकेगी कांग्रेस?
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आर्थिक सुधारों की वकालत करने वाली कांग्रेस राजनीतिक नफे नुकसान की चाहत में पुराने सिद्धांतों को छोड़ सकती है। पार्टी मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों के एजेंडे को रोकने पर गंभीरता से विचार कर रही है। कांग्रेस पर बीमा, कोयला आवंटन और कंपनी विधेयक रोकने का भारी दबाव है।
पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर अंतिम फैसले के लिए मंगलवार को संसद भवन के पार्टी कार्यालय में प्रमुख नेताओं की बैठक बुलाई है। उधर, मंगलवार को ही सरकार राज्यसभा में बीमा संशोधन विधेयक पेश करेगी। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोनिया को बीमा विधेयक पर सरकार का समर्थन करने की सलाह दी है।
मगर पार्टी के अंदर एक बड़ा वर्ग हाईकमान पर सरकार के आर्थिक सुधार के एजेंडे को रोकने के लिए दबाव बना रहा है। राज्यसभा में सोमवार को कांग्रेस, माकपा, तृणमूल कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष ने सरकार को देश में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने समेत तमाम मुद्दों पर घेरने की कोशिश की।
मनमोहन की सलाह को भी किया दरकिनार
बीमा बिल को हंगामे के जरिए रोकने की रणनीति है, जबकि कोयला आवंटन संबंधित विधेयक को राज्यसभा की सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग कांग्रेस कर सकती है। कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि आर्थिक सुधारों से संबंधित बिलों को रोकने के चलते ही इन मुद्दों को जोर-शोर से उठाया जा रहा है।
पार्टी के एक नेता ने कहा कि कांग्रेस बीमा विधेयक का खुलकर विरोध करना नहीं चाहती। क्योंकि यह उसकी ओर से ही बनाया गया विधेयक था।
इसलिए बिल पर गठित राज्यसभा की सेलेक्ट कमेटी में कांग्रेस सदस्यों ने इसका औपचारिक तौर पर समर्थन किया। मगर बदली परिस्थितियों में कांग्रेस पर्दे के पीछे से इसे रोकने की कोशिश कर सकती है।