मुंबई ही नहीं महाराष्ट्र में भी कांग्रेस की बुरी हालत
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अबकी बार मोदी सरकार। मुंबई ही नहीं महाराष्ट्र में भी कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। कांग्रेस की ओर से सिर्फ राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व आदर्श घोटाले में फंसे अशोक चव्हाण ही नांदेड़ सीट पर जीत हासिल कर सके। जबकि एनसीपी चार सीटों पर बढ़त बना पाई।
इसके अलावा पूरे राज्य में नमो लहर में विपक्षी दल के उम्मीदवार बह गए। इसमें गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, प्रिया दत्त और मिलिंद देवड़ा जैसे दिग्गज भी नहीं बच पाए।
महाराष्ट्र की 48 सीट में से सर्वाधिक 23 सीटों पर भाजपा ने जीत का परचम लहराया जबकि सहयोगी पार्टी शिवसेना ने 19 और अन्य ने एक सीट पर जीत दर्ज कर एनडीए की झोली में 43 सीटें डाल दी। उधर, अपने बेटे नीलेश राणे की हार की जिम्मेदारी लेते हुए राज्य के उद्योग मंत्री नारायण राणे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
कांग्रेस का सबसे खराब प्रदर्शन
महाराष्ट्र में कांग्रेस का यह अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन है। 1977 में भी कांग्रेस की इतनी बुरी स्थिति नहीं हुई थी। उस दौरान नागपुर सीट कांग्रेस ने जीती थी, लेकिन इस बार भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी ने करीब एक लाख मत से जीत हासिल कर कांग्रेस को चकमा दे दिया।
कांग्रेस हमेशा से ही महाराष्ट्र को अपना सुरक्षित गढ़ मानती रही है, लेकिन मोदी की सुनामी में यह किला पूरी तरह ध्वस्त हो गया। केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे भाजपा के शरद बनसोड़े से करीब डेढ़ लाख मतों के अंतर से हारे।
इसी तरह एनसीपी में नंबर दो के नेता भारी उद्योगमंत्री प्रफुल्ल पटेल, कांग्रेस के मुकुल वासनिक, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतीक पाटिल, केंद्रीय मंत्री माणिकराव गावित, राज्य के पीडब्लूडी मंत्री और पिछड़ों के नेता कहे जाने वाले छगन भुजबल, युवक कांग्रेस अध्यक्ष राजीव सातव आदि मोदी की सुनामी में बह गए।
शरद पवार की बेटी ने बचाई सीट
एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की पुत्री सुप्रिया सुले अपनी बारामती सीट कायम रखने में सफल रहीं। मुंबई की छह और ठाणे जिले की चार सीट सहित इन 10 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला।
प्रिया दत्त, केंद्रीय राज्यमंत्री मिलिंद देवड़ा, कांग्रेस महासचिव गुरुदास कामत, एकनाथ गायकवाड़, संजय निरूपम और एनसीपी के संजय पाटिल को करारी हार झेलनी पड़ी। दिवंगत भाजपा नेता प्रमोद महाजन की पुत्री पूनम महाजन प्रिया दत्त को मात देकर जाइंट किलर के रूप में सामने आई और भाजपा के किरीट सोमैया ने भी पांच साल बाद दोबारा जीत का स्वाद चखा।
इस चुनाव में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना, आम आदमी पार्टी (आप), समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार भी मैदान में थे लेकिन मोदी लहर में इन्हें भी कोई तवज्जो नहीं मिली।