नेहरू के बाद 30 साल यहां से नहीं जीती कांग्रेस
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पंडित जवाहर लाल नेहरू के गढ़ में कांग्रेस की हालत अच्छी नहीं है। जिस जगह से नेहरू जी ने पहला चुनाव लड़ा, वहां कांग्रेस की हालत यह है कि 1984 के बाद से अब तक हुए सात चुनावों में पार्टी को जीत हासिल नहीं हुई।
नेहरूजी के अलावा लाल बहादुर शास्त्री दो बार इसी सीट से लोकसभा पहुंचे तो 1984 के चुनाव में सुपर स्टार अमिताभ बच्चन ने कांग्रेस के टिकट से संगम नगरी में जीत का परचम लहराया। हालांकि इसके बाद कांग्रेस ऐसे बिखरी कि उसे फिर कभी संभलने या लौटने का मौका नहीं मिला। कांग्रेस के बाद इलाहाबाद और फूलपुर सीट पर जनता दल (जेडी), भाजपा, सपा और बसपा का कब्जा रहा।
कांग्रेस का बिखराव
कांग्रेस के बिखराव की शुरुआत 1977 के चुनाव से ही हो गई थी। इस चुनाव में भारतीय लोक दल (बीएलडी) ने यूपी की सभी संसदीय सीटों पर कब्जा किया। फूलपुर सीट से बीएलडी की कमला बहुगुणा और इलाहाबाद से बीएलडी के जनेश्वर मिश्र को जीत मिली। 1980 के चुनाव में फूलपुर से जनशक्ति पार्टी सेक्युलर के बीडी सिंह और इलाहाबाद सीट से इंडियन नेशनल कांग्रेस (आई) के विश्वनाथ प्रताप सिंह ने जीत का परचम लहराया।
1984 के चुनाव में फूलपुर से कांग्रेस के टिकट पर राम पूजन पटेल एवं इलाहाबाद सीट से अमिताभ बच्चन ने जीत हासिल की। अमिताभ बच्चन को कुल पड़े मतों के 68.21 फीसदी वोट मिले, जो दोनों सीटों पर हुए अब तक के किसी भी चुनाव का एक रिकार्ड है। हालांकि इस चुनाव के बाद कांग्रेस को दोनों सीटों पर लौटने का मौका कभी नहीं मिला।
वर्ष 1989 और 1991 के चुनाव में दोनों सीटें जनता दल के खाते में गईं। 1989 में जनता दल के टिकट पर फूलपुर से रामपूजन पटेल एवं इलाहाबाद से जनेश्वर मिश्र जीते। 1991 के चुनाव में फूलपुर से रामपूजन पटेल को जनता दल के टिकट पर दोबारा जीत मिली जबकि इलाहाबाद से इस बार जनता दल से सरोज दुबे निर्वाचित हुईं।
सपा का है कब्जा
1996 के चुनाव में फूलपुर से सपा के जंग बहादुर पटेल और इलाहाबाद सीट पर भाजपा के मुरली मनोहर जोशी ने बाजी मारी। यही परिणाम 1998 के चुनाव में रहा और दोनों सीटों पर तत्कालीन सांसदों का कब्जा बरकरार रहा।
1999 के चुनाव में बीजेपी के डॉ. मुरली मनोहर जोशी लगातार तीसरी बार इलाहाबाद सीट से चुनाव जीते जबकि फूलपुर से सपा के टिकट पर धर्मराज सिंह पटेल को जीत मिली, जो इस बार भी सपा के टिकट पर फूलपुर से प्रत्याशी हैं। 2004 के चुनाव में दोनों सीटों पर सपा का कब्जा रहा।
फूलपुर से अतीक अहमद और इलाहाबाद से रेवती रमण सिंह जीते जबकि 2009 के चुनाव में पहली बार बसपा ने फूलपुर में जीत का परचम लहराया। बसपा से कपिल मुनि करवरिया सांसद निर्वाचित हुए। वहीं, इलाहाबाद सीट पर सपा से रेवती रमण सिंह का कब्जा बरकरार रहा।
शुरुआती पांच चुनावों तक था कांग्रेस का कब्जा
देश के आजाद होने के बाद लगातार पांच लोकसभा चुनावों तक इलाहाबाद की सीटों पर कांग्रेस का कब्जा रहा। हालांकि सबसे पहले हुए 1951 के चुनाव में फूलपुर नाम से कोई संसदीय सीट नहीं थी। पहले चुनाव में इलाहाबाद डिस्ट्रिक्ट (ईस्ट) कम जौनपुर (वेस्ट) की दो सीटों से जवाहर लाल नेहरू एवं मसुरियादीन और इलाहाबाद डिस्ट्रिक्ट (वेस्ट) से श्री प्रकाश ने जीत का परचम लहराया। तीनों कांग्रेसी थे।
इसके बाद 1957 के चुनाव में इलाहाबाद सीट से लाल बहादुर शास्त्री ने जीत दर्ज की जबकि फूलपुर की दोनों सीटों पर जवाहर लाल नेहरू एवं मसुरियादीन का कब्जा बरकरार रहा। 1962 के चुनाव में भी यही परिणाम रहा और इलाहाबाद से शास्त्री जीते। तब फूलपुर नाम से सिर्फ एक सीट रह गई और वहां से जवाहर लाल नेहरू ने जीत हासिल की।
1967 के चुनाव में कांग्रेस ने दोनों सीटों से नए प्रत्याशी उतारे और पार्टी के टिकट पर फूलपुर से विजय लक्ष्मी पंडित एवं इलाहाबाद से एच. कृष्णा ने जीत हासिल की। वहीं, 1971 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर फूलपुर से विश्वनाथ प्रताप सिंह और इलाहाबाद से हेमवती नंदन बहुगुणा को जीत मिली।