कांग्रेस ने मोदी पर इसलिए शुरू किए निजी हमले
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लोकसभा चुनाव में मतदान का तीसरा चरण पूरा होते ही कांग्रेस अब मोदी के खिलाफ करो या मरो की रणनीति के साथ मैदान में उतर गई है। अब तक मोदी के खिलाफ निजी हमलों से परहेज कर रही पार्टी ने आक्रामक रणनीति अपनाते हुए अब तीन सूत्रीय एजेंडे के तहत मोदी को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश शुरू कर दी है।
पार्टी के शीर्ष मैनेजर गुजरात दंगों, महिला जासूसी कांड और अब मोदी के शादीशुदा होने के खुलासे के दम पर आगे का चुनावी अभियान खींचने की कोशिश में हैं। पार्टी में हालांकि इस रणनीति में हिस्सेदारी नहीं रखने वाले कई नेताओं को आशंका है कि कहीं मोदी के खिलाफ निजी हमलों से पार्टी को ही नुकसान न हो जाए। मगर कांग्रेस के वार रूम में जुटे मैनेजरों की टीम अब परिणाम की परवाह किए बगैर मोदी को रोकने की योजना बना रही है।
पार्टी के मैनेजर मान रहे हैं कि पार्टी के चुनाव प्रचार में भाजपा की तरह आक्रमकता नहीं है। दूसरी कतार के नेता तो मोदी पर सियासी वार कर रहे हैं। मगर शीर्ष नेतृत्व मोदी के खिलाफ कड़े हमले नहीं कर पा रहा है।
कांग्रेस मोदी पर करेगी तीखे हमले
देशभर में कांग्रेस के उम्मीदवारों की तरफ से भी यही शिकायत आ रही है कि पार्टी का प्रचार अभियान तीखा नहीं है। बेहद धीमे और हलके ढंग से मोदी के प्रचार अभियान को रोकने की रणनीति को अपनाया जा रहा है। पार्टी के एक शीर्ष नेता ने कहा कि अभी आक्रामक नहीं होंगे तो कब होंगे। अब समय बचा नहीं है। इसलिए अब रणनीति बदली गई है।
राहुल गांधी और सोनिया गांधी मोदी पर तीखे हमले करने में गुरेज नहीं करेंगे। पार्टी लोगों तक खुलकर संदेश देना चाह रही है कि जो आदमी अपनी पत्नी को उसका हक नहीं दे सका वह देश की महिलाओं को उनका क्या हक देगा। गुजरात दंगों और जासूसी कांड को राहुल और सोनिया आने वाले दिनों में अपनी रैलियों में फिर से उठा सकते हैं। साथ ही पार्टी इन मुद्दों को लेकर सड़कों पर भी उतरने की तैयारी में है।
वैसे पार्टी में इस रणनीति के उलटे नतीजे आने की आशंका जताने वाले भी कम नहीं हैं। राहुल की टीम से बाहर हुए कई नेता इस रणनीति को ठीक नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि बेहद निजी होकर मोदी पर हमला करना ठीक नहीं है। एक नेता ने उदाहरण दिया कि गुजरात विधानसभा चुनाव में सोनिया गांधी की ओर से मोदी को मौत का सौदागर कहना पार्टी को भारी पड़ा था।