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गठबंधन की राजनीति का दामन नहीं छोड़ेगी कांग्रेस

Sat, 19 Jan 2013 09:20 PM IST
जयपुर/ब्यूरो
जयपुर/ब्यूरो Updated Sat, 19 Jan 2013 09:20 PM IST
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congress will not leave coalition politics

सत्ता की सियासत के लिए कामयाबी के फार्मूले पर जयपुर में चिंतन कर रही कांग्रेस कई राज्यों में अपने कमजोर आधार की वजह से गठबंधन राजनीति का दामन फिलहाल नहीं छोड़ेगी। मगर गठबंधन की इस मजबूरी में पार्टी राज्यों में घुटने नहीं टेकेगी और अपने वोट बैंक की कुर्बानी देकर सत्ता की सियासत से परहेज करेगी।

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चिंतन शिविर में राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा के दौरान उभरी इस राय को कांग्रेस की जयपुर घोषणा का हिस्सा बनाया जा रहा है। कांग्रेस के सामने अगले दशक की राजनीतिक चुनौतियों पर दूसरे दिन चिंतन शिविर में हुई चर्चा के दौरान गठबंधन राजनीति को लेकर दीपा दासमुंशी, निर्मल खत्री समेत कई लोगों ने सवाल उठाए।
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इनका कहना था कि जिन राज्यों में कांग्रेस का गठबंधन हुआ वहां क्षेत्रीय पार्टियों ने ज्यादा फायदा लिया और पार्टी को कुछ नहीं मिला। उलटे कांग्रेस के वोट बैंक पर ही प्रतिकूल असर पड़ा। हालांकि इन सवालों के बावजूद चिंतन बैठक के बाद जयपुर घोषणा के लिए तैयार अंतिम मसौदे में कांग्रेस ने गठबंधन की राजनीति को जारी रखते हुए राज्यों में अपना आधार बढ़ाने की बात कही है।
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कांग्रेस संगठन के साथ चुनावी सियासत को परवान चढ़ाने के लिए ब्लॉक से लेकर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्षों और एआईसीसी के प्रदेश प्रभारियों के चुनाव नहीं लड़ने का दिशानिर्देश बनाया जा रहा है। चुनावी सूरत बेहतर बनाने के लिए लोकसभा का उम्मीदवार एक साल पहले तो विधानसभा का तीन महीने पहले घोषित करने का प्रस्ताव है।

पाकिस्तान को सैनिक का सिर काटे जाने की घटना के खिलाफ कड़ा संदेश देने के लिए शनिवार को तमाम प्रतिनिधियों ने एक प्रस्ताव पारित करने की मांग रखी गई है। दो दिनों का चिंतन शिविर शनिवार को खत्म हो गया। इस चिंतन में उठे इन तमाम मुद्दों को मसौदे में शामिल किया गया है।

कांग्रेस कार्यसमिति की देर शाम हुई बैठक में इस मसौदे पर मुहर लग गई। अब रविवार को एआईसीसी की बैठक में इस पर चर्चा होगी और कांग्रेस की 2014 की सियासत के रोडमैप का ऐलान हो जाएगा।

पाक को लेकर भावनाओं में बहकर नहीं हो फैसला: राहुल
एलओसी पर भारतीय जवानों के साथ बर्बरता की घटना को लेकर कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने कहा है कि हमें कड़े कदम उठाने चाहिए, लेकिन पाकिस्तान को लेकर कोई भी फैसला भावनाओं में बहकर नहीं किया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक जयपुर चिंतन शिविर में एक समूह चर्चा के दौरान राहुल ने यह बात कही।

दिलचस्प यह भी है कि चर्चा के दौरान मौजूद रहे विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि इस तरह के उकसाने वाले हालात के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। भारत की कूटनीति तमाम देशों के साथ दोस्ताना संबंध रखने की है, चाहे वे आपस में कितने ही शत्रु क्यों नहीं हों। हालांकि पार्टी प्रवक्ता राशिद अल्वी ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाने की बात कही।

महिलाओं के लिए उठीं कई मांगें
कांग्रेस के चिंतन शिविर में महिलाओं को सुरक्षा के साथ ताकतवर बनाने के लिए केंद्र सरकार की नौकरियों में आरक्षण देने की भी आवाज बुलंद की गई है। सूत्रों के अनुसार दिल्ली गैंगरेप घटना के संदर्भ में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मसले पर चर्चा के दौरान पुलिस सुधार समेत तमाम कदम उठाने पर सहमति तो जाहिर की ही गई।


इसमें कहा गया कि देश के आधे थानों में सभी कर्मी महिलाएं हों। जघन्य मामलों में दुष्कर्मियों को फांसी देने की मांग भी उठाई गई। कुछ सदस्यों ने महिलाओं को आर्थिक रूप से ताकतवर बनाने को प्राथमिकता देने के लिए केंद्र की नौकरियों में आरक्षण देने का सुझाव रखा।

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