50 हजार करोड़ का घपला करने वाले को छोड़ेगी सरकार!
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सरकार पुणे के घोड़ा कारोबारी हसन अली खान को कर चोरी और हवाला के आरोपों से मुक्त करने के बारे में सोच रही है।
सूत्रों के मुताबिक सरकार इस नतीजे पर पहुंची है कि जांच एजेंसियों के पास हसन पर विदेश में भारी मात्रा में काला धन जमा करने के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं है।
सरकार खान के बैंक खाते से लेनदेन के बारे में स्विट्जरलैंड प्रशासन के सहयोग नहीं करने के कारण भी परेशान है। अब तक इकट्ठा किए गए सबूतों के आधार सरकार इस नतीजे पर पहुंची है कि अदालत में हसन अली के खिलाफ मुकदमा नहीं टिक पाएगा।
50 हजार करोड़ का था घपला
पुणे के 60 वर्षीय कारोबारी हसन अली नजरबंद है। वर्ष 2007 में मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और राजस्व विभाग की उस पर नजर पड़ी थी। उसके खिलाफ हवाला, कर चोरी और पासपोर्ट कानून तोड़ने का मुकदमा दर्ज किया गया था।
इतना ही नहीं आयकर विभाग ने खान को 50 हजार करोड़ रुपये का कर नोटिस थमाया था। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि आयकर विभाग के पास भी इस दावे की पुष्टि के लिए पुख्ता साक्ष्य नहीं हैं।
विदेश से नहीं मिल पाए सबूत
उन्होंने इस मामले में जांच एजेंसियों के विफल होने के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहयोग के साथ-साथ मौजूद संपत्तियों की कम कीमत सहित कई अन्य कारण भी बताएं हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हमने सरकार के कानून विभाग को सुझाव दिया है कि हसन अली और उसके साथियों के खिलाफ अब तक हमारे पास जो भी साक्ष्य हैं वे अदालत में नहीं टिकेंगे और इस मामले में और साक्ष्य मिलने की संभावना न के बराबर है।