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असहिष्णुता के खिलाफ लड़ती रहेगी कांग्रेस : राहुल

Sun, 08 Nov 2015 09:44 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sun, 08 Nov 2015 09:44 PM IST
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Congress will continue to fight Intolerance

देश में कथित असहिष्णुता को लेकर सियासी जुबानी जंग को धार देते हुए राहुल गांधी ने मोदी सरकार के अलावा अब संघ संचालक मोहन भागवत पर भी सीधा हमला बोल दिया है।

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राहुल गांधी ने कहा है कि देश में पहली बार केंद्र में फांसीवादी सरकार बन गई है और चारों तरफ देश में डर का माहौल बना हुआ है। संघ संचालक को निशाने पर लेते हुए राहुल ने कहा कि हम इस देश में मोहन भागवत की औसत सोच नहीं चाहते। आरएसएस का मकसद धर्म और निरंकुश शासन की स्थापना करना है।
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राहुल ने संघ पर अपने मकसद को हासिल करने के लिए देश की स्वतंत्रता, विकास, धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक गणराज्य को धवस्त करने का आरोप लगाया।

राहुल ने कहा कि पिछले 18 महीने में संघ ने यही काम किया है। शनिवार को राहुल देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की 125वीं जयंती से संबंधित सम्मेलन में बोल रहे थे। राहुल ने संघ पर खुलकर वार किए।
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धर्मनिरपेक्षता हमारे खून में है, हम आरएसएस को हरा देंगे

Congress will continue to fight Intolerance

उन्होंने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी संगठन ने संविधान के मूल्यों और विचार का विरोध किया है। राहुल ने कहा, धर्मनिरपेक्षता हमारे खून में है और हमसे आरएसएस हार जाएगा।

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने सम्मेलन में मौजूद पार्टी नेताओं को कहा, हम यहां इसलिए एकत्र हुए हैं, क्योंकि देश में शांति और स्वतंत्रता को घायल किया जा रहा है। कांग्रेस असहिष्णुता के खिलाफ लड़ती रहेगी।

राहुल ने कहा, भारत की असहिष्णुता ने ही हमें महान बनाया है। हम अपनी सहिष्णुता बाकी दुनिया को दे सकते थे। उन्होंने कहा कि आजादी, हमारे अधिकारों और लोकतांत्रिक माहौल पर हमले की वजह से हम एक साथ आए है।

इससे पहले सम्मेलन में कुछ वक्ताओं ने कांग्रेस से सवाल उठाए थे कि उसने सत्ता में रहते हुए सहिष्णुता के लिए क्या किया। इसके जवाब में राहुल ने सवाल उठाने वाले लोगों को कहा कि कांग्रेस को बड़ा होने की जरूरत है। उन्होंने गठबंधन की राजनीति को लेकर सत्ता में रहते हुए कांग्रेस की मजबुरियों की तरफ भी संकेत दिया।

राहुल ने कहा कि कांग्रेस को सत्ता के समीकरणें से जूझना पड़ता है और यह बहुत कुछ बल देता है। जब मैं कांग्रेस के अंदर काम करता हूं तो सत्ता के विचार के साथ काम करना होता है और उससे हम खुद को अचानक ही अदल नहीं कर सकते।

राहुल ने कहा कि हम कालबुर्गी, पंसारे, धाबोलकर, अखलाक और मोसिन शेख को श्रृधांजलि देते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी धर्म किसी भी सार्वजनिक नीति का आधार नहीं बन सकता। धर्म एक निजी मसला है। जिसमें किसी का दखल ही नहीं है।

राहुल ने तर्क दिया कि धर्मनिरपेक्षता आस्था का ही हिस्सा है। ये नागरिकों की मूलभूत आजादी की रक्षा करता है। राहुल ने कहा कि पंडित नेहरू ने देश में सहिष्णुता के लिए बड़े काम किए हैं, जिसका फायदा आज हम उठा रहे हैं।

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