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राहुल की सीट को लेकर उलझन में कांग्रेस

Fri, 07 Feb 2014 09:17 PM IST
Updated Fri, 07 Feb 2014 09:17 PM IST
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Congress under pressure in amethi loksabha seat

उत्तर प्रदेश का चुनावी अखाड़ा शुरू से ही नेहरू-गांधी परिवार का विश्वसनीय रहा है। इसलिए नहीं कि यहाँ से हर दफा उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने धमाकेदार प्रदर्शन किया है।

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बल्कि इसलिए कि परिवार के सभी सदस्यों के लिए उत्तर प्रदेश की सीटें एक आसान ज़रिया रही हैं लोक सभा पहुँचने का। चाहे फूलपुर से जीतने वाले जवाहरलाल नेहरू हों या सुल्तानपुर और रायबरेली से संजय और इंदिरा गांधी। या फिर अमेठी से राजीव, सोनिया और राहुल गांधी क्यों न हो।
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और तो और गांधी परिवार के ही सदस्य लेकिन कांग्रेस से दूर रहीं मेनका गांधी और उनके बेटे वरुण को भी उत्तर प्रदेश में ही लोकसभा विजय मिली है। लेकिन 2014 के आम चुनाव के पहले जो देखने को मिल रहा है वो कम से कम मुझे तो पहले नहीं दिखा।
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पूरा कांग्रेसी महकमा इस उधेड़बुन में लगा है कि कांग्रेस के 'राजकुमार' राहुल गांधी की अमेठी सीट इस बार भी उनके लिए उतनी ही सुरक्षित रहे जितनी पहले थी।

अपने प्रदर्शन को लेकर आशंका में कांग्रेस

Congress under pressure in amethi loksabha seat

2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने प्रदेश में राहुल के नेतृत्व में धमाकेदार प्रदर्शन किया था। ख़ुद विश्लेषकों को भी शायद इस बात अंदाज़ा नहीं था कि कांग्रेस के हाथ यूपी की 80 में से 22 सीटें लग जाएंगी।

प्रदेश में कईयों ने कहना शुरू कर दिया था, 'राहुल गांधी अब यहाँ अपने पैर जमा चुके हैं'। लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव के नतीजे इस उम्मीद से इतर थे।

उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यों वाली विधानसभा के लिए मात्र 28 उम्मीदवार ही विजयी हो सके। राहुल गांधी ने ख़ुद इस हार की 'ज़िम्मेदारी' ली थी।

राहुल की क्षमता पर शक!

Congress under pressure in amethi loksabha seat

साल 2014 के आम चुनाव से पहले कांग्रेस में कई दफ़ा ऐसे स्वर भी उभरे की राहुल को अब पार्टी की कमान पूरी तरह से अपने हाथों में ले लेनी चाहिए। काफ़ी मान-मुनव्वल के बाद हुआ भी यही।

लेकिन इससे ठीक पहले 2013 में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में ज़्यादातर में कांग्रेस को करारी हार मिली। इसके साथ ही राहुल के नेतृत्व क्षमता पर दोबारा सवाल उठने लगे।

कुमार व‌िश्वास और वरुण गांधी बने चुनौती

Congress under pressure in amethi loksabha seat

दिल्ली में जबरदस्त प्रदर्शन करने वाली आम आदमी पार्टी ने इसी बीच ये घोषित किया कि उनके नेता कुमार विश्वास राहुल के गढ़ अमेठी में उन्हें चुनौती देने पहुँच रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं ने शुरू में इसे बहुत गंम्भीरता से नहीं लिया लेकिन उन्हें चेताया कुछ दूसरे घटनाक्रमों ने भी। इलाके में इस ख़बर ने ज़ोर पकड़ना शुरू कर दिया है कि भाजपा नेता और राहुल के चचेरे भाई वरुण गांधी अमेठी से सटी सुल्तानपुर सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।

इस बीच सुल्तानपुर से कांग्रेसी सांसद और पूर्व में संजय गांधी के लिए अमेठी सीट 'ऑफर' करने वाले संजय सिंह को कांग्रेस ने राज्यसभा में सीट दिलवा दी है।

तमाम राजनीतिक गतिविधियों के बीच ख़ुद राहुल गांधी अपने चुनाव क्षेत्र अमेठी पहुंचे, जहाँ पहली बार उन्हें कुछ जगहों पर काले झंडे भी दिखाए गए। इसके बाद से इलाक़े में कांग्रेस संगठन ने अपनी जान लगा दी लगती है, जिससे राहुल की जीत आगामी आम चुनाव में सुनिश्चित रहे।

दूसरी पार्ट‌ियों की भी है नजर

Congress under pressure in amethi loksabha seat

उत्तर प्रदेश में आम चुनाव से पहले कांग्रेस को थोडा 'कमज़ोर' मानते हुए दूसरे राजनीतिक दलों ने भी गांधी-नेहरू परिवार के इलाक़े में पकड़ बनाने की कोशिश की है। अगर वरुण गांधी सुल्तानपुर से लड़ते हैं तो जानकारों के मुताबिक उनकी जीत तय मानी जा रही है।

पिछले विधानसभा चुनाव में सुल्तानपुर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी। यहाँ तक कि अमेठी से संजय सिंह की पत्नी अमिता सिंह तक अपनी सीट हार गईं थीं।

बसपा अध्यक्ष मायावती भी सुल्तानपुर-अमेठी-रायबरेली इलाक़े के लिए मजबूत उम्मीदवारों की खोज कर रही हैं।

बदल भी सकती है सीट

Congress under pressure in amethi loksabha seat

ऐसी ख़बरें भी आ रहीं हैं कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के 22 सांसदों में से कम से कम तीन ने जीत का यक़ीन न होने पर कांग्रेस आलाकमान से अपने चुनाव क्षेत्र बदलवाने की सिफारिश की है।

अमेठी में दौरा करने पर भी साफ समझ आ रहा है कि इलाक़े में सब कुछ वैसा नहीं है जैसा मैंने ख़ुद 2009 में देखा था।

राहुल गांधी भले ही अपनी सीट निकाल ले जाएं लेकिन दिलचस्प रहेगा यह देखना कि कितने अंतर से वे ऐसा कर पाते हैं। और ऐसा ही कुछ मंज़र मध्य उत्तर प्रदेश में फ़िलहाल कांग्रेस पार्टी का भी दिखता है।

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