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मुसलमानों को डराने के आरोप से कांग्रेस सकते में

Wed, 16 Oct 2013 12:07 AM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 16 Oct 2013 12:07 AM IST
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congress under fear after madni's statement
कांग्रेस भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का हौव्वा दिखाकर मुसलमानों को डरा रही है। प्रमुख इस्लामी संगठन जमीयत ए उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष महमूद मदनी ने यह आरोप लगाकर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
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कांग्रेस ने मदनी के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस नीतियों और मुद्दों पर चुनाव लड़ती है और वह किसी व्यक्ति तथा उसकी पहचान को लेकर आगे नहीं बढ़ती है।
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चुनावी मौसम में मदनी के आरोपों ने कांग्रेस को सकते में डाल दिया है। दरअसल, मोदी के भाजपा की ओर से पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर सामने आने के बाद सांप्रदायिकता बनाम धर्मनिरपेक्षता की सियासत हावी हो रही है।
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कांग्रेस सांप्रदायिक भाजपा को सत्ता से दूर रखने के नाम पर धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एकजुट होने का आह्वान कर रही है। यही काम तीसरे मोर्चे की हवा भरने वाले सपा और वामदल कर रहे हैं।

मगर मदनी के निशाने पर कांग्रेस के आने से उसके लिए सांप्रदायिकता के लिए भाजपा को कोसना बेहद मुश्किल हो सकता है।

यही नहीं, अभी तक कांग्रेस गुजरात दंगों की बार बार याद दिलाकर मोदी को घेर रही है। मदनी के आरोपों के बाद पार्टी के लिए ऐसा करना भी कठिन हो सकता है।

हालांकि इस समय पार्टी मदनी पर पलटवार करने के बजाय मोदी पर ही निशाना साधकर इस विवाद से बचने की
कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी कहते है कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने का सवाल ही नहीं है।

जब यह सवाल ही नहीं उठता तो डराने और डरने का सवाल ही कहां से उठता है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज नीतियों के आधार पर वोट करता है। उनके डरने होने की कोई बात नहीं है।


क्या कहा था मदनी ने

तथाकथित सेक्युलर पार्टियां मुस्लिम वोट पाने के लिए मोदी का डर पैदा कर रही हैं लेकिन इससे मुस्लिम समाज को डरने की कोई जरूरत नहीं है।

भारत में सेक्युलिज्म जड़ों तक रचा-बसा है और आम जनता कभी सांप्रदायिक ताकतों को जीतने नहीं देगी। सत्तासीन सेक्युलर पार्टियों को नकारात्मक प्रचार की बजाय सकारात्मक अभियान से वोट मांगने चाहिए।

उन्हें बताना चाहिए कि आखिर उनकी सरकारों ने अन्य की तुलना में मुस्लिमों के लिए क्या किया और क्या करेंगी।
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