दिल्ली में चेहरा बचाने की कांग्रेस के सामने चुनौती
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झारखंड और जम्मू कश्मीर के बाद दिल्ली में चुनाव करवाने की खबर से तो पार्टी के मैनेजरों चिंतित है। दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस केनेताओं की आपसी फूट और पार्टी के खिलाफ बन रही आम राय को देखते हुए पार्टी के शीर्ष मैनेजर डैमेज कंट्रोल में जुटे हुए हैं।
दिल्ली में शीला दीक्षित के समर्थक उनको आगामी चुनाव में फिर से चेहरा बनाने की कोशिश में हैं, जबकि उनके विरोधी उनको किनारा करने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं।
मंगलवार को केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली में सरकार बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह चुनाव से डरी हुई है। इसलिए प्रदेश में अपना मुख्यमंत्री घोषित नहीं कर पा रही है।
अपना पता नहीं, बीजेपी पर निशाना
पार्टी के नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि भाजपा हमेशा से चुनाव से पहले अपना मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करती है, लेकिन इस बार उनके पास दिल्ली के लिए कोई नेतृत्व बचा नहीं है, इसलिए मुख्यमंत्री उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं हो रहा है।
दरअसल, भाजपा पर कांग्रेस जितना ही आरोप लगाए। लेकिन दिल्ली प्रदेश कांग्रेस में नेताओं के बीच अहम की लड़ाई चल रही है। पार्टी हाईकमान को भी इस बात का अहसास है। शीला दीक्षित जब से केरल के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर राजधानी लौटी हैं। बदली बदली नजर आ रही है।
वह भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफों के पुल बांध रही हैं। इससे प्रदेश के नेता गुस्से में बैठे हैं। पार्टी महासचिव अजय माकन और प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली इसकी शिकायत पार्टी हाईकमान से कर चुके हैं, लेकिन प्रदेश कांग्रेस में शीला के कई समर्थक नेता उन्हें फिर से पार्टी का चेहरा बनाने में जुटे हुए हैं।