फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   congress tense on Strong candidates in haryana.

कांग्रेस में मजबूत उम्मीदवारों का टोटा, बागियों पर नजर

Thu, 11 Sep 2014 10:31 AM IST
धीरज कनोजिया/अमर उजाला, नई दिल्ली
धीरज कनोजिया/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 11 Sep 2014 10:31 AM IST
विज्ञापन
congress tense on Strong candidates in haryana.

हरियाणा में भाजपा और इंडियन नेशनल लोकदल ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है, जबकि कुलदीप बिश्नोई की हजकां भी अगले दो दिनों में अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान करने जा रही है।

विज्ञापन


मगर कांग्रेस इस मामले में सबसे पिछड़ी चल रही है। दिलचस्प बात तो यह है कि पिछड़ने का कारण यह नहीं कांग्रेस में टिकट के लिए दावेदारों के बीच मारामारी के चलते देर हो रही है।
विज्ञापन


हकीकत में कांग्रेस जानबूझकर देरी कर रही है। टिकट बंटवारे को लेकर हो रही बैठकों में इस बात पर चिंता जताई गई है कि पार्टी के पास मजबूत उम्मीदवार नहीं हैं, जबकि मजबूत नेता कांग्रेस का टिकट तक लेने के लिए तैयार नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दूसरी पार्टियों खासकर भाजपा में ज्यादातर मजबूत नेता टिकट पाने की जुगत में लगे हुए हैं। इसलिए पार्टी के दिग्गजों ने रणनीति बनाई है कि जिन मजबूत प्रत्याशियों को दूसरी पार्टियों में टिकट नहीं मिलता उन्हें कांग्रेस तुरंत टिकट दे देगी।

इस रणनीति के तहत पार्टी देखो और इंतजार की नीति पर काम कर रही है। प्रदेश नेतृत्व की सलाह पर पार्टी हाईकमान लगातार टिकट की प्रक्रिया को धीमा करने में जुटा हुआ है।

वेट एंड वॉच की नीति पर कांग्रेस

congress tense on Strong candidates in haryana.

पार्टी के एक शीर्ष पदाधिकारी ने बताया कि जमीनी स्तर पर पार्टी की हालत नाजुक है। कांग्रेस के पास मजबूत उम्मीदवारों की कमी है। इसलिए दूसरी पार्टियों खासकर भाजपा से टिकट नहीं मिलने वाले मजबूत उम्मीदवारों के लिए पार्टी में रेड कारपेट बिछाया जा रहा है।

दूसरी तरफ पार्टी अपने नाराज नेताओं को एकजुट करने में जुटी हुई है। भाजपा और इनेलो में जाने वाले नेताओं की लिस्ट तैयार कर खुद मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके बेटे उनके घर जाकर उन्हें मना रहे हैं।

हरियाणा में पार्टी को दस सालों की सत्ता विरोधी लहर का भी सामना करना पड़ रहा है। मगर राज्य में लोकसभा चुनाव में करारी हार से पार्टी का हौसला पस्त लग रहा है।

हरियाणा की विधानसभा सीटों के लिए पार्टी को इस बार सिर्फ 1212 आवेदन ही मिले हैं। जबकि 2009 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को आठ हजार से ज्यादा आवेदन मिले थे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed