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रेल किराए में बढ़ोतरी के साथ कांग्रेस

Wed, 09 Jan 2013 08:44 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Wed, 09 Jan 2013 08:44 PM IST
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congress support rail fire hike

रेल किराए में वृद्धि का कांग्रेस ने स्वागत किया है। उसने कहा है कि यह वृद्धि ‘बेहद अनिवार्य’ हो गई थी। लेकिन इस बात का उसने कोई सीधा जवाब नहीं दिया कि क्या कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की सहमति से यह बढ़ोतरी की गई है। वहीं भाजपा, वामदलों और तृणमूल कांग्रेस ने इस किराया वृद्धि का जमकर विरोध किया है।

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कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने यहां मीडिया से कहा, ‘कांग्रेस पार्टी और सरकार दोनों अलग-अलग हैं। यदि रेल मंत्रालय किराया बढ़ाता है तो यह सोनिया गांधी की इजाजत लेकर नहीं होता। रेल मंत्री ही इस बात का सबसे बेहतर जवाब दे सकते हैं कि क्यों उन्होंने इस वक्त रेल किराए में वृद्धि का फैसला किया।’ लेकिन क्या इस मुद्दे पर सोनिया गांधी से विचार विमर्श किया गया था, अल्वी ने कहा कि वह इस बारे में कुछ नहीं जानते।
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जब उनसे पूछा गया कि 21 जनवरी की आधी रात से सभी श्रेणियों का रेल किराया बढ़ाने के फैसले को पार्टी किस नजरिये से देखती है तो उन्होंने कहा कि यह ऐसा फैसला है, जिसे और नहीं टाला जा सकता था। अल्वी के अनुसार यात्री रेल किराये में वृद्धि का विचार लंबे समय से चल रहा था और इस वक्त देश को इस तरह के फैसलों की जरूरत है।
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उल्लेखनीय है कि चालू वित्त वर्ष में लिए गए इस फैसले से जनवरी 21 से मार्च 31 के बीच मंत्रालय को 1200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी। रेल मंत्री पवन बंसल ने बुधवार को यह फैसला सुनाते हुए इस बात से इंकार नहीं किया कि आने वाले दिनों में रेलवे का माल भाड़ा भी बढ़ाया जा सकता है।

भाजपा, वामदलों और तृणमूल कांग्रेस ने इस वृद्धि के लिए सरकार की कड़ी आलोचना की है और इसे तत्काल वापस लेने (रोलबैक) की मांग की है। इन पार्टियों ने इस फैसले को ‘जन विरोधी’ करार देते हुए कहा कि जनता पहले ही महंगाई से दबी जा रही है, किराया वृद्धि उस पर और उस वजन डालने जैसी बात है।

भाजपा ने कहा कि रेल/आम बजट से कुछ हफ्तों पहले यह वृद्धि यूपीए सरकार के ‘लोकतंत्र-विरोधी’ चेहरे को बताती है। वहीं वामदलों ने नॉन-एसी क्लास में किराये में बढ़ोतरी को तत्काल वापस लेने की मांग सरकार से की है।

रेलवे को पटरी पर लाने के लिए यह जरूरी
उद्योग जगत ने रेल यात्री किराए में वृद्धि का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे यात्रियों को बढ़िया सुविधाएं और बेहतर सुरक्षा मुहैया कराई जा सकेगी। साथ ही उसने कहा कि रेलवे को पटरी पर लाने के लिए भी यह वृद्धि जरूरी थी।

भारतीय उद्योग महासंघ (सीआईआई) ने कहा कि जिस तरह से रेलवे घाटे में जा रहा था और पिछले दस वर्षों से किराया नहीं बढ़ा था, उसे देखते हुए यह जरूरी कदम है। सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी के अनुसार, ‘यह आंशिक वृद्धि रेलवे को घाटे से उबरने में बड़ा सहारा देगी। इससे यात्रियों को रेलवे बेहतर सुविधाएं दे सकेगा।’


बढ़ रहा था घाटा
रेलवे की यात्री श्रेणी में घाटा लगातार बढ़ रहा था। 2004-05 में यह घाटा 1,059 करोड़ रुपये था जो 18 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से बढ़ते हुए 2010-11 में 19,964 करोड़ रुपये पहुंच गया था। वर्तमान वित्त वर्ष में इसके 25 हजार करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान था।

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