शीत सत्र के लिए कांग्रेस की रणनीति, सरकार के छूटेंगे पसीने!
शीतकालीन सत्र शुरू होते ही विपक्ष से बढ़ी तल्खी के बीच सरकार को प्रमुख बिलों को कानूनी जामा पहनाने में पसीना छूटना तय है। बीमा बिल पर जहां कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा की अगुवाई वाली प्रवर समिति ने रिपोर्ट देने के लिए और मोहलत मांग कर जहां अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं।
वहीं भ्रष्टाचार निरोधक बिल, रियल स्टेट बिल और नि:शक्त जन अधिकार बिल पर भी सरकार अब तक विपक्ष के साथ सहमति नहीं बना पाई है। सरकार के लिए कोयला खदान (राष्ट्रीयकरण) संशोधन बिल पारित कराना भी बड़ी चुनौती होगी जिसके लिए वह पहले ही अध्यादेश जारी कर चुकी है।
इसी प्रकार भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन पर अड़ी सरकार इस पर भी फिलहाल सहमति नहीं बना पाई है। सरकार के लिए मुश्किल यह है कि जहां राज्यसभा में उसके पास बहुमत नहीं है, वहीं श्रम कानूनों में संशोधन सहित कई विधेयकों पर खुद संघ परिवार को आपत्ति है।
फिलहाल सरकार की योजना बीते सत्र के दौरान ही बीते मॉनसून सत्र की तरह जरूरी संख्या जुटाने की है। हालांकि कांग्रेस विपक्षी दलों को गोलबंद कर राज्यसभा में सरकार के लिए मुसीबत खड़ी करने की तैयारी में है।
महत्वपूर्ण बिलों पर अब भी विपक्ष से सहमति नहीं
जहां तक भ्रष्टाचार निरोधक संशोधन बिल की बात है तो इस पर सरकार विपक्ष के साथ सहमति नहीं बना पाई है। कई विपक्षी दलों को व्हिसलब्लोवर को भी सजा के दायरे में रखने पर आपत्ति है तो कई दल वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने से पहले सरकार की अनुमति अनिवार्य किए जाने के खिलाफ हैं।
बहरहाल सरकार की योजना सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के साथ सहमति बनाने की है। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने संसद सत्र में सरकारी कामकाज में अड़चन कम से कम आए इसका रास्ता निकालने के लिए शनिवार को सभी दलों के नेताओं को चर्चा के लिए बुलाया है।
सरकार की चुनौती बीमा कानून संशोधन बिल होगी इसका संकेत तो कांग्रेस ने अभी से फच्चर फंसाना शुरू कर दे दिया है। सरकार इस बिल को जल्द से जल्द कानूनी जामा पहनाना चाहती है, जबकि इससे जुड़ी कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा की अगुवाई वाली प्रवर समिति ने रिपोर्ट देने के लिए और समय की मांग कर दी है।
इसी प्रकार रियल एस्टेट नियमन और विकास बिल पर भी विपक्ष के तेवर बेहद कड़े हैं। विपक्ष खासतौर पर इस बिल में राज्यों के रियल एस्टेट कंपनियों पर निगाह रखने के लिए रियल एस्टेट रेग्यूलेटरीज अथॉरिटीज के सख्त खिलाफ है। यही हाल भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल पर है।
विपक्ष को गोलबंद करने में जुटी कांग्रेस
कांग्रेस और वाम दल किसी भी कीमत में इस बिल पर संशोधन के लिए राजी नहीं हैं। इनका कहना है कि सरकार संशोधन कर भूमि अधिग्रहण कानून को कमजोर करना चाहती है। इसके अलावा मनरेगा कानून में भी संशोधन के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय प्रस्तावित बिल को स्वरुप दे रहा है। मनरेगा में प्रस्तावित संशोधन की सरकार की तैयारियों का भी कांग्रेस ने विरोध करने का पहले ही ऐलान कर रखा है।
राज्यसभा में पेश किए गए ट्राई संशोधन बिल पर हालांकि सहमति बनने केआसार हैं। जबकि सरकार ने अरसे से लंबित निशक्त जन अधिकार बिल को इस सत्र में पेश करने का फैसला किया है। इस बिल पर राजनीतिक आम राय है और पारित कराने में कोई अड़चन नहीं दिख रहा।
शीत सत्र में बिलों को कानूनी जामा पहनाने की राह में कांग्रेस के साथ-साथ सरकार के अपने भी राह में रोड़े अटका रहे हैं। कांग्रेस जहां हर बिल पर अड़ंगा डाल सरकार की मुसीबत बढ़ाना चाहती है, वहीं संघ और उससे जुड़े अनुषांगिक संगठन श्रम कानून में सुधार संबंधी विधेयक में शामिल कई प्रावधानों पर आपत्ति है।
हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि सत्र के दौरान कई विधेयकों को पारित कराने में सरकार पहले की तरह सपा, बसपा और तृणमूल कांग्रेस का सहयोग लेगी। इस बीच राकांपा से संबंध बेहतर होने के कारण भी सरकार को जरूरी संख्या जुटा लेने का भरोसा है।
बैंकिग सुधारों से जुड़े बैंकिंग बिल, पेंशन बिल, फैक्ट्री एक्ट संशोधन बिल आदि जैसे आर्थिक सुधारों से जुड़े बिल भी सोमवार से शुरू हो रहे सत्र में सरकार के एजेंड़े में शामिल रहेंगे। इन बिलों पर भी राजनीतिक सहमति बननी अभी बाकी है।