फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   aap will decide to form a new government in Delhi

'आप' के नहले पर कांग्रेस का दहला

Tue, 17 Dec 2013 01:19 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 17 Dec 2013 01:19 PM IST
विज्ञापन
aap will decide to form a new government in Delhi
कांग्रेस ने दिल्ली में सरकार के गठन को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) की सभी शर्तें मानकर गेंद अब आप के पाले में डाल दी है। इसके बाद सभी नजरें आप पर टिक गई हैं कि वह सरकार बनाने के लिए अब भी कदम बढ़ाती है या नहीं।
विज्ञापन


आप ने कहा है कि इस बारे में वह मंगलवार को कोई फैसला ले सकती है। कांग्रेस ने आप को बिना शर्त समर्थन का प्रस्ताव दिया था, जिसके जवाब में आप ने 18 शर्तें रख दी थीं कि कांग्रेस इन पर हामी भरे तभी वह समर्थन लेगी।
विज्ञापन

 
कांग्रेस महासचिव एवं दिल्ली प्रभारी शकील अहमद ने कहा कि आप के नेता अरविंद केजरीवाल ने उनकी पार्टी को पत्र भेजा था उसका जवाब भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने पत्र में 18 मुद्दों पर समर्थन मांगा था, उनमें से 16 पर समर्थन की जरूरत ही नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्हें प्रशासनिक आदेश से लागू किया जा सकता है। अहमद ने कहा कि दो अन्य मुद्दे लोकपाल विधेयक तथा दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने को लेकर थे। लोकपाल विधेयक कांग्रेस संसद में पारित करा रही है।

दिल्ली में लोकायुक्त कानून में यदि आप पार्टी संशोधन करना चाहेगी और वे विधानसभा की परिधि में होंगे तो कांग्रेस उनका समर्थन करेगी। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के बारे में कांग्रेस महासचिव ने कहा कि उनकी पार्टी भी यह चाहती है और उसने अपने चुनाव घोषणा पत्र में यह बात कही है।

वहीं, आप के नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि पार्टी मंगलवार सुबह की बैठक में कांग्रेस से मिले जवाब पर विस्तार से विचार विमर्श करेगी और इसके बाद पार्टी के अगले कदम के बारे में फैसला किया जाएगा।

गौरतलब है कि आप ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और भाजपा के अध्यक्ष राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर 18 मुद्दों पर पार्टी के रुख को स्पष्ट करने को कहा था।

पार्टी ने शनिवार को उपराज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात करके सरकार बनाने के बारे में फैसला करने के लिए दस दिन का समय मांगा था। इस बीच, भाजपा ने कहा है कि हमें आप की शर्तों पर जवाब देने की जरूरत नहीं है क्योंकि हमने उसे समर्थन देने का कोई प्रस्ताव ही नहीं दिया था।  

उप राज्यपाल ने की राष्ट्रपति शासन की सिफारिश
दिल्ली में सरकार के गठन को लेकर बने गतिरोध पर उप राज्यपाल नजीब जंग की रिपोर्ट पर गृह मंत्रालय कानूनी सलाह ले रहा है। समझा जाता है कि जंग ने अपनी रिपोर्ट में दिल्ली विधानसभा को निलंबित रखने और राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की है।


उन्होंने रिपोर्ट में कहा है कि दिल्ली में कोई भी राजनीतिक दल या गठबंधन फिलहाल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। सूत्रों ने बताया कि निवर्तमान दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल 18 दिसंबर को खत्म हो रहा है और उपराज्यपाल की रिपोर्ट पर कोई भी फैसला इससे पहले ही लेना होगा। सूत्रों का कहना है कि यदि कोई पार्टी सरकार बनाने के लिए आगे नहीं आती है तो अगले दो दिन में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है।  

क्या है स्थिति
70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा
आप के पास 28 सीट हैं और कांग्रेस (8) के समर्थन से वह बहुमत का जादुई आंकड़ा (36) पा लेगी।
भाजपा गठबंधन 32 सीट

आप ने इन 18 मुद्दों पर मांगा था समर्थन
1. विधायक, मंत्री लाल बत्ती नहीं लेंगे, बड़े बंगले नहीं मिलेंगे। विधायक और पार्षद का फंड बंद किया जाए। यह पैसा सीधे मोहल्ला सभाओं को दिया जाए।
2. जनलोकपाल बिल पास होना चाहिए। आप यह बिल रामलीला मैदान में पारित करना चाहती है।
3. अपने मोहल्ले-कॉलोनी और गलियों के बारे में निर्णय लेने का अधिकार सीधे जनता को दिया जाए।
4. दिल्ली को भारतीय संघ के अन्य राज्यों के समान दर्जा मिले। डीडीए व पुलिस पर से केंद्र का नियंत्रण खत्म हो।
5. बिजली कंपनी के बही-खातों की जांच की जाएगी। बिजली के दाम आधे किए जाएंगे।
6. बिजली के मीटरों की जांच कराई जाए।
7. घरों में 700 लीटर पानी मुफ्त। उस कानून को रद्द करेंगे, जिसमें हर वर्ष दर बढ़ाने का प्रावधान है।
8. अनधिकृत कॉलोनियों में एक वर्ष के अंदर मूलभूत सुविधाएं मिलें।
9. झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों को सस्ती दरों पर पक्के मकान दिए जाएं।
10. ‘आप’ ने पाया है कि स्थायी और नियमित कामों के लिए कर्मचारी ठेके पर रखे जाते हैं। इसे बंद कर स्थायी नियुक्तियां होंगी।
11. व्यापारी बेवजह के नियमों से रिश्वत लेने व देने के लिए मजबूर हैं। उनके लिए उचित व्यवस्था की जाए।
12. आप दिल्ली में किराना में एफडीआई लाने के खिलाफ है।
13. ग्रामसभा की मंजूरी के बिना किसी की जमीन नहीं ली जाएगी।
14. 1800 नगर निगम स्कूलों को बेहतर बनाना, 500 नए स्कूल खोले जाएंगे। निजी स्कूलों में डोनेशन का सिस्टम बंद किया जाएगा।
15. नए सरकारी अस्पताल खोले जाएंगे। इनमें निजी अस्पतालों से भी बेहतर इलाज का प्रबंध हो।
16. महिलाओं की सुरक्षा के लिए स्पेशल सुरक्षा दल हो।
17. कई मुद्दों पर नगर निगम व केंद्र सरकार के सहयोग की जरूरत होगी। क्या भाजपा व कांग्रेस मदद करेंगी।
18. नई अदालतें बनें और जजों की नियुक्ति हो ताकि मामले 6 महीने से एक साल के अंदर निपटाए जा सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed