कांग्रेस ने माना तेलंगाना बड़ी गलती!
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तेलंगाना मामले को लेकर कांग्रेस की तमाम तैयारियों के बावजूद संसद में जो दो दिन पहले हुआ, उसने सभी को हैरान कर दिया। जब संसद के भीतर कांग्रेस के फ्लोर मैनेज करने वाले नेताओं से पूछा गया, तो जवाब तलाशने में काफी दिक्कत हुई।
इन नेताओं का कहना था कि उन्होंने तेलंगाना बिल को लेकर सारी तैयारियां कर रखी थीं, लेकिन अगर कोई नेता जेब में छिपाकर स्प्रे की बोतल ले आए, तो वो क्या कर लेंगे।
बात सही है। वो वाकई स्प्रे की बोतल के बारे में कुछ नहीं कर सकते थे। लेकिन कांग्रेस तेलंगाना को लेकर काफी कुछ कर सकती थी, जो उसने नहीं किया और यह मामला अब उसके गले की फांस बन गया है। पार्टी के नेता भी इस बात को स्वीकार नहीं करने से हिचक रहे।
कांग्रेस ने मानी गलती
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और सूत्रों का मानना है कि पार्टी से तेलंगाना मामले को लेकर बड़ी चूक हुई है। उन्होंने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बताया, "हमसे बड़ी गलती हुई। हम इस मामले को कतई नहीं संभाल पाए। सारी बात बिगड़ गई।"
कांग्रेस अब मान रही है कि तेलंगाना जैसे गंभीर मु्द्दे को संभालने को लेकर उससे चूक हुई, तो इसकी वजह है। उसे अंदाजा हो रहा है कि आगामी लोकसभा चुनावों में आंध्र से बुरी खबर आ सकती है।
वरिष्ठ नेता ने कहा, "हम आंध्र प्रदेश में बुरी तरह हारेंगे। और सीटों का नुकसान दोनों तरफ होगा। हमें तेलंगाना से ज्यादा सीटें नहीं मिलेंगी क्योंकि वहां टीआरएस अपना खेल दिखाएगी और सीमांध्र के लोग हमसे खफा हैं।"
स्प्रे छिड़कने से आंध्र की सीटों तक
कांग्रेस जानती है कि तेलंगाना से उसे भारी नुकसान हो गया है। उसके अपने मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी बंटवारे के खिलाफ खड़े हो गए और अलग पार्टी बनाने का खौफ दिखा रहे हैं।
इसके अलावा पार्टी ने अपने छह सांसदों को निष्कासित कर दिया था, क्योंकि वो उसी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ले आए। इनमें से एक एल राजगोपाल ने पेपर स्प्रे मारकर संसद को शर्मसार कर दिया।
कांग्रेस के नेता दबी जबान में कह रहे हैं कि चूक यह हुई कि पार्टी को पहले तेलंगाना राष्ट्र समिति का विलय अपने में करना चाहिए था और इसके बाद पृथक राज्य बनाने की दिशा में कदम उठाना चाहिए था।
चुनावों में भुगतना होगा नतीजा
लेकिन पार्टी ने ऐसा नहीं किया और उसे अब नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। आंध्र प्रदेश ने पिछले चुनावों में कांग्रेस को सबसे ज्यादा सांसद दिए थे और इस बार हालत काफी खस्ता है।
टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू भाजपा से हाथ मिलाने के करीब हैं और एनडीए के संयोजक बनने जा रहे हैं। जाहिर है, सीमांध्र इलाके में उन्हें जोरदार फायदा होने की उम्मीद है।
इसके अलावा कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के बेटे जगन मोहन रेड्डी भी दस से ज्यादा लोकसभा सीटें जीतने की आस कर रहे हैं।
तेलंगाना में कांग्रेस को कुछ फायदा होने की उम्मीद थी, लेकिन टीआरएस को उसका सीधा फायदा होगा, क्योंकि इसके आंदोलन की अगुवाई उसके हाथों में थी। और तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस में उसका विलय नहीं हुआ।