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कांग्रेस ने निकाला BJP का तोड़, जीतकर भी हार जाएंगे मोदी!

Tue, 29 Apr 2014 11:47 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 29 Apr 2014 11:47 AM IST
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congress ready to support 'secular' front to stop modi

कांग्रेस सियासत की पुरानी खिलाड़ी है और इस खेल के सारे गुर जानती है। पिछले दस साल से सत्ता में मौजूद देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी इन दिनों सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है, लेकिन उसने अभी हथियार डाले नहीं है।

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नरेंद्र मोदी की 'लहर' पर सवार भाजपा इस बार कुर्सी तक पहुंचने के लिए पूरा जोर लगा रही है और उसे उम्मीद है कि दस साल विपक्ष में बैठने के बाद उसे इस बार यह मौका मिल सकता है।
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लेकिन कांग्रेस इन दिनों ऐसी रणनीति तैयार कर रही, जिसमें भाजपा की उससे ज्यादा सीटें आने के बावजूद मोदी को पीएम बनने से रोका जा सकता है। इसके लिए पार्टी त्याग करने के लिए भी राजी है।
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कांग्रेस ने अगुवा की दावेदारी छोड़ी?

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दरअसल, प्लान यह है ‌कि कांग्रेस नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने से रोकने के लिए केंद्र में 'सेकुलर' गठबंधन की अगुवाई करने का अपना दावा छोड़ देगी।

सोनिया गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले अहमद पटेल ने टीओआई को दिए एक इंटरव्यू में साफ किया कि जहां तक केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार को रोकने की बात है, तो कांग्रेस किसी भी हद तक जा सकती है।

पटेल ने कहा, "कांग्रेस को सत्ता की भूख नहीं है। पार्टी सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता तक पहुंचने से रोने के लिए सभी जरूरी विकल्पों पर विचार कर सकती है। सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श के बाद कांग्रेस अध्यक्ष अंतिम फैसला लेंगी।" पटेल सोनिया के राजनीतिक सचिव और अहम रणनीतिकार हैं।

'सेकुलर' गठबंधन को समर्थन

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कांग्रेस के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता की तरफ से साफ संदेश दिया गया है कि कांग्रेस दूसरी तथाकथित सेकुलर ताकतों को समर्थन देने के लिए तैयार है, ताकि भाजपा का रास्ता रोका जा सके।

जाहिर है, इस संकेत से उन क्षत्रपों के लिए संभावनाओं का दरवाजा खुल सकता है, जो एनडीए के साथ नहीं मिले हैं। पहले भी इस तरह की खबर आई थी और कपिल सिब्बल ने संकेत दिए थे, लेकिन अब यह लगभग साफ हो गया है।

पटेल का कहना है, "जहां तक धर्मनिरपेक्षता का सवाल है, तो कांग्रेस बड़े से बड़ा बलिदान दे सकती है।" हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार किया कि कांग्रेस इस बार लोकसभा चुनावों में अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन करने जा रही है।

'प्रियंका पर हमला सही नहीं'

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अहमद पटेल ने यह मानने से भी इनकार कर दिया क‌ि नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए सरकार बनाने के काफी करीब पहुंच चुका है। सोनिया के करीबी नेता ने कहा कि कांग्रेस इन सर्वे को इसी तरह खारिज करती है, जैसा कि उसने 2004 में किया था।

अहमद पटेल ने प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा का खुलकर बचाव करने को भी सही ठहराया। उन्होंने कहा क‌ि सोनिया गांधी के दामाद साजिश का शिकार हो रहे हैं, जो गांधी परिवार और कांग्रेस को बदनाम करने के लिए रची गई है।

भाजपा पर प्रियंका के हमले भी इस बात का संकेत हैं कि वो अब सोनिया और राहुल के लिए चुनाव प्रचार करने से आगे जाकर अपनी राजनीतिक भूमिका बढ़ाना चाहते हैं।

मोदी के सामने कड़ी चुनौती

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भाजपा अगले प्रधानमंत्री के रूप के नरेंद्र मोदी को पेश कर रही है और कांग्रेस के लिए फिलहाल काफी मुश्किलें दिख रही हैं। लेक‌िन चुनाव बाद यह समीकरण बदल सकता है।

अगर ऐसा हुआ, तो कांग्रेस हारने के बावजूद जीत सकती है और जीत तक पहुंचने के बावजूद भाजपा के मुंह से ‌निवाला दूर रह सकता है। कांग्रेस इन दिनों गैर-एनडीए गठबंधन को बाहर से समर्थन देने या उसमें शामिल होने से भी गुरेज नहीं दिखाएगी।

हालांकि, कांग्रेस का यह आकलन काफी अंदाजों पर टिका है। उसका मानना है कि अगर मोदी एनडीए को 272 के करीब नहीं ले जा पाते और वो 220-230 पर अटक जाता है, तो कांग्रेस का कमाल दिखेगा।

तैयार हो रही है योजना

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सत्तारूढ़ दल का आकलन है कि भले अभी यह माना जा रहा है कि क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस में भारी गिरावट आने से भाजपा और उसके सहयोगियों को काफी बल मिलेगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह नहीं है।

कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर एनडीए का प्रदर्शन हल्का रहता है और कांग्रेस 100-120 सीटों तक पहुंचने में कामयाब रहती है, तो वो गैर-भाजपा गठबंधन को एक छत के नीचे लाने के विकल्पों पर विचार कर सकती है।

पार्टी सूत्र ने कहा, "अगर कांग्रेस को 140 सीट मिलती है, तो वो गठबंधन की अगुवाई के बारे में विचार कर सकती है। ऐसा 2004 में हुआ था। लेकिन कांग्रेस इस बार नेतृत्व को लेकर लचीला रुख अपनाएगी, क्योंकि उसके लिए मोदी के बजाय क्षेत्रीय दलों से हाथ मिलाना बेहतर रहेगा।"

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