अरुणाचल में राष्ट्रपति शासन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस
अरुणाचल प्रदेश पर मची रार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के केन्द्र सरकार के निर्णय के खिलाफ सत्तारूढ़ कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। पार्टी ने केन्द्र सरकार के निर्णय को पक्षपातपूर्ण बताते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की है।
अरुणाचल प्रदेश के सीएम नबम तुकी ने केन्द्र के निर्णय के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान करते हुए कहा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है इसलिए भारत सरकार को निर्णय का इंतजार करना चाहिए।
कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व ने भी केन्द्र सरकार की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए इसे राजनीतिक असहिणुता करार दिया था। पार्टी प्रवक्ता आनंद शर्मा ने केन्द्र की आलोचना करते हुए इसे जबरन सत्ता हथियाने की चाल बताया था।
बता दें कि अरुणाचल प्रदेश में पिछले कई दिनों से राजनीतिक घमासान चल रहा है। कांग्रेस के 21 बागी विधायक राज्य के मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नबाम तुकी के खिलाफ हो गए और कैलिखो पॉल को विधायक दल का नेता चुन लिया।
राष्ट्रपति ने भी मांगी सफाई
इसके बाद मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने इसे संविधानपीठ को सौंप दिया। अभी भी मामला संविधानपीठ में लंबित है। इसी घमासान के बीच रविवार को केन्द्रीय कैबिनेट ने राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी।
मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार मामला राष्ट्रपति तक पहुंचा तो उन्होंने भी इस मुद्दे पर केन्द्र सरकार से सफाई मांगी है। इसी मुद्दे पर केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार सुबह राष्ट्रपति से मुलाकात भी की।
कांग्रेस भी लगातार राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की करने की मांग करती आ रही है। अरुणाचल सरकार की मौजूदा स्थिति की बात करें तो राज्य में 60 विधायकों में से 47 विधायक कांग्रेस के हैं जबकि 11 विधायक भाजपा के हैं। जबकि दो अन्य निर्दलीय हैं।