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जाटों पर चुनावी दांव लगाएगी सरकार

Tue, 05 Nov 2013 08:09 AM IST
अमर उजाला/नई दिल्ली
अमर उजाला/नई दिल्ली Updated Tue, 05 Nov 2013 08:09 AM IST
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congress political bet on jat community

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस जाट बिरादरी को आरक्षण देने का सियासी दांव चलने जा रही है। पार्टी और सरकार ने इस पर जल्द फैसला करने की तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि इसके लिए गठित मंत्रिसमूह (जीओएम) जल्द ही सरकार को जाटों को आरक्षण देने की सिफारिश करेगा।

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वित्त मंत्री पी चिदंबरम की अध्यक्षता वाला जीओएम ओबीसी श्रेणी में जाटों का कोटा तय करने की सिफारिश करने पर विचार कर रहा है। दरअसल सरकार अपने इस सियासी दांव से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में भाजपा को चित करना चाहती है।
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उल्लेखनीय है कि इन राज्यों में इस बिरादरी की अच्छी खासी संख्या चुनाव नतीजे तय करने में निर्णायक भूमिका अदा करती रही है। इसके अलावा मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी इस बिरादरी की संख्या अच्छी खासी है।
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जीओएम में शामिल एक मंत्री के अनुसार फिलहाल आरक्षण की मांग पर सभी का रुख सकारात्मक है। जीओएम ने अब तक आरक्षण के पक्ष में विभिन्न जाट संगठनों और राज्य सरकारों के दावों का अध्ययन करना शुरू कर दिया है। अब इस बारे में जल्द ही निर्णय ले लिया जाएगा।

उक्त मंत्री का कहना था कि ज्यादा संभावना जीओएम द्वारा जाटों को ओबीसी श्रेणी में आरक्षण का कोटा तय करने की सिफारिश की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि बेहद विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों में घिरे हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने कई बार प्रधानमंत्री के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात कर इस संबंध में जल्द निर्णय का अनुरोध किया था।


हालांकि एनसीबीसी के सूत्रों का कहना है कि उसकी पहली सिफारिश, जिसमें जाट बिरादरी को आरक्षण देने के लायक नहीं माना गया था, के आधार पर अदालत सरकार के फैसले को फिर से पलट सकती है। वैसे भी वर्ष 2011 में भारी दबाव के बाद सरकार ने एनसीबीसी को अपने फैसले की समीक्षा का अधिकार दिया।

इसके बाद एनसीबीसी अलग से जाटों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर आईसीएसएसआर से अध्ययन कराया है। हालांकि आईसीएसएसआर ने फिलहाल अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है।

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