BJP, AAP पर कांग्रेस ने चलाया ब्रह्मास्त्र
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आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर भाजपा और आम आदमी पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। जाहिर है, ये दोनों दल जहां एक तरफ एक-दूसरे पर निशाना लगा रहे हैं, वहीं बीते दस साल से देश की कमान संभाल रही कांग्रेस पर उनकी खास कृपा बरस रही है।
कांग्रेस को इस बात का पूरा अहसास है कि इस बार उसे सत्ता विरोधी लहर का सामना करना है। भ्रष्टाचार और घोटालों से जुड़े मामले बार-बार उठाए जा रहे हैं और इनसे निपटना आसान नहीं होगा। ऐसे में कांग्रेस ने अपने तरकश से सारे तीर निकाल लिए हैं।
जनता का दिल जीतने के लिए कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार हर वो कदम उठा रही है, जो आगामी चुनावों में वोट दिला सकते हैं। साल 2009 के चुनावों का सामना करने उतरी मनमोहन सरकार ने किसानों की कर्ज माफी का दांव चला था और अब ऐसी जगह निशाना लगाया है, जहां सबसे ज्यादा असर हो।
अब कैसे घटे सीएनजी-पीएनजी के दाम?
लोकसभा चुनावों से सीधे तौर पर जुड़े एक फैसले में सरकार ने सोमवार को घरेलू स्तर पर तैयार सस्ती प्राकृतिक गैस की सप्लाई प्राथमिकता में बदलाव किया, ताकि रसोई गैस जलाना और ऑटोमोबाइल दौड़ाना कुछ सस्ता पड़ने लगे।
पाइप के जरिए लोगों तक घरों में पहुंचने वाली गैस (पीएनजी) 20 फीसदी या 5 रुपए प्रति क्यूबिक मीटर घट जाएगी। इसके अलावा कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) दिल्ली में अब 30 फीसदी सस्ती हो गई है। 15 रुपए प्रति किलो दाम कम हो गए हैं।
हालांकि, सरकार ने यहां काफी चालाकी दिखाई है। जनता को यह बात भी याद रखनी चाहिए कि यह राहत केवल मार्च अंत तक के लिए है, क्योंकि सरकार ने पिछले महीने अधिसूचना जारी कर दी है और 1 अप्रैल से घरेलू स्तर पर तैयार होने वाली गैस के लिए नई प्राइसिंग गाइडलाइंस लागू हो जाएंगी। इस फॉर्मूले के तहत गैस के दाम दोगुने स्तर पर पहुंचकर 8.4 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट पहुंच जाएंगे।
मोइली ने मारा चौका, जीता दिल
इस फैसले की जानकारी देते हुए पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि कीमतों में कमी इसलिए मुमकिन थी, क्योंकि सरकार ने सीएनजी और पीएनजी की सारी जरूरतें पूरी करने के लिए घरेलू गैस का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसका दाम एडमिनिस्टर्ड प्राइसिंग मैकेनिज्म (एपीएम) के तहत तय होता है।
महाराष्ट्र और हरियाणा को छोड़कर सभी राज्यों में जहां सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क है, वहां भी खुदरा दामों में कमी देखने को मिलेगी, क्योंकि वे ऊंची कीमतों वाली एलएनजी और एपीएम गैस के मिश्रण से अब पूरी तरह एपीएम गैस से चलाया जाएगा।
मुंबई और पुणे को अपनी सारी जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त एपीएम गैस मिलती है, वहीं दूसरे शहर आवश्यकता को पूरा करने के लिए करीब चार गुना महंगी आयातित एलएनजी का इस्तेमाल करते हैं।
राहुल ने कहा और बढ़ गए रियायती सिलेंडर
सरकार ने केवल सीएनजी-पीएनजी के दाम नहीं घटाए, बल्कि सीधे आम आदमी के दिल तक पहुंचने के लिए और भी कई लुभावने कदम उठाए हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक में कहा था कि 9 सिलेंडर से काम नहीं चल रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से रियायती सिलेंडर की संख्या 12 करने का आग्रह किया था।
राहुल कहें और असर न हो, ऐसा मुमकिन नहीं। कुछ दिन बाद ही सरकार ने रियायती सिलेंडर की तादाद 9 से बढ़ाकर 12 कर दी। इसके अलावा चुनावों से ऐन पहले एक बड़ा सुधार पलट दिया, जिसमें ईंधन पर मिलने वाली सब्सिडी को आधार से जोड़ा गया था।
जाहिर है, इससे नंदर नीलेकणि को जरूर झटका लगा होगा। सरकार आधार स्क्रीम पर 3,500 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। सरकार इसे प्रभावी प्रशासन और सेवाओं-सब्सिडी की असरदार डिलीवरी के लिए जोरदार स्कीम के रूप में भी पेश करती रही थी।
अपनी आधार स्कीम पर ही नाराज कांग्रेस नेता
जनवरी की शुरुआत में राहुल गांधी ने कहा था कि आधार भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी पहल है। हालांकि, स्कीम के फायदों को लेकर हाई-प्रोफाइल कैम्पेन के बावजूद कई कांग्रेस नेताओं ने शिकायत की कि पहले ग्राहक से बाजार भाव पर गैस सिलेंडर खरीदने को कहा और उसके बाद बैंक खाते में सब्सिडी पहुंचाना काफी जटिल प्रक्रिया है।
कई ग्राहकों के पास आधार कार्ड नहीं हैं और जो एनरॉल करा चुके हैं, उन्हें ज्यादा खुशी तब होती जब बाजार भाव पर सिलेंडर खरीदने से पहले ही उन्हें सब्सिडी मिल जाती।
पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने उस वक्त कहा था, "हम नहीं चाहते कि योजना को अमली जामा पहनाने की प्रक्रिया की वजह से एक भी ग्राहक दिक्कत महसूस करे। हम सिस्टम को दुरुस्त बनाएंगे।"
पेट्रोल के दाम नहीं बढ़े, सिलेंडर पर दाम घटे
हाल में डीजल के दामों में 50 पैसे प्रति मीटर की मामूली बढ़त आई, लेकिन सरकार ने पेट्रोल के दामों में कोई इजाफा नहीं किया। आम जनता को डीजल की टीस कम सताए, इसलिए साथ ही एक और दांव चला गया।
गैर रियायती गैस सिलेंडर के दामों में 107 रुपए की भारी कटौती की गई और इसका श्रेय दिया गया अंतरराष्ट्रीय बाजार में दामों में कमी को दिया गया। 12 रियायती सिलेंडरों के बाद खरीदे जाने वाली रिफिलिंग पर यह राहत मिलेगी।
अगर ग्राहक 12 रियायसती सिलेंडर खर्च करने के बाद 14.2 किलोग्राम वाला रसोई गैस सिलेंडर लेते हैं, तो दिल्ली में इसके दाम 1241 रुपए से घटकर 1134 रुपए पड़ेंगे।