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वाड्रा पर अमेरिकी अखबार के खुलासे से कांग्रेस परेशान

Sat, 19 Apr 2014 12:07 PM IST
Updated Sat, 19 Apr 2014 12:07 PM IST
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congress on vadra case published in wall street journal
लोकसभा चुनाव के ठीक बीच अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल के राबर्ट वाड्रा की संपत्ति के बारे में सनसनीखेज खुलासे से कांग्रेस खुद को असहज स्थित में पा रही है।
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पार्टी ने फजीहत से बचने के लिए नरेंद्र मोदी की ओर से गुजरात में उद्योगपति अदाणी को कौड़ियों के दाम में कथित तौर पर जमीन देने के मामले को अपनी ढाल बनाया है।
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'कोई अनुभव नहीं था वाड्रा के पास'

congress on vadra case published in wall street journal

अमेरिकी अखबार ने खुलासा किया है कि सोनिया गांधी के दामाद ने एक दशक में रियल एस्टेट का साम्राज्य खड़ा कर लिया है, जबकि उनके पास कोई अनुभव भी नहीं था।

अखबार के खुलासे पर ज्यादा बोलने की बजाय पार्टी मोदी और अदाणी के व्यापारिक रिश्तों को ज्यादा उछालकर अपना बचाव कर रही है।

सिब्बल को उतारा गया मैदान में

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कांग्रेस हाईकमान के निकट संबंधी का मसला होने के कारण पार्टी के लिए इसका जवाब देना भी आसान नहीं रहा। इसलिए पार्टी ने कानून मंत्री और वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल को मैदान में उतारा।

सिब्बल ने कहा कि कानून अपना काम करेगा। किसी के पास कोई सबूत है तो वह सामने लाए। फिर उन्होंने आगे जोड़ा कि अदाणी को मोदी ने कौड़ियों के दाम जमीन दी है।

सिब्बल ने आरोप लगाया कि गुजरात में जमीन और शराब का अवैध कारोबार हो रहा है, जिससे वहां तीन हजार करोड़ के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

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'सत्ता में संपर्क का उठाया फायदा'

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अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के बारे में एक सनसनीखेज खबर राजस्थान के कोलायत इलाके से छापी है। अखबार ने खुलासा किया है कि कैसे दसवीं पास वाड्रा ने सत्ता में संपर्क का फायदा उठाकर अरबों रुपये का रियल एस्टेट का साम्राज्य खड़ा कर लिया। जबकि उन्हें इस काम का कोई तजुर्बा तक नहीं था।

अखबार के अनुसार, पाकिस्तान की सीमा से लगते कोलायत इलाके के ग्रामीणों को साल 2009 नहीं भूलता। उस साल काले रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी में एक दरमयाने कद का एक शख्स पहुंचता है और ग्रामीणों से जमीन का मोलभाव करता है। यह शख्स बिना किसी हुज्जत के गांववालों को उनकी जमीन का हाथोंहाथ नगद भुगतान कर देता है।

'जमीन की खरीद में कोई गड़बड़ नहीं'

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भू राजस्व के रिकॉर्ड के अनुसार सैकड़ों एकड़ जमीन की खरीदारी करने वाला यह शख्स और कोई नहीं बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद और प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा हैं। जमीन की खरीदारी के दौरान ही केंद्र ने घोषणा कर दी कि सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन दिया जाएगा। 2011 में राज्य सरकार ने भी ऐसा ही ऐलान कर दिया।

भू राजस्व के दस्तावेज बताते हैं कि तीन साल के भीतर इस जमीन की कीमत में छह गुना का इजाफा हो गया। वाड्रा ने 2000 एकड़ जमीन लगभग सात करोड़ रुपये में खरीदी। राज्य सरकार के अधिकारी बस इतना ही कहते हैं कि वे जांच कर रहे हैं कि जमीन खरीद में कोई गड़बड़ तो नहीं है।

वहीं वाड्रा के प्रवक्ता का कहना है कि चुनाव के समय इस तरह की हायतौबा मचती ही है, जमीन की खरीदारी में कोई गड़बड़ नहीं है। लेकिन चुनाव में यह मुद्दा जरूर है। हालांकि वाड्रा अभी तक किसी सरकारी जांच में दोषी नहीं पाए गए हैं। हरियाणा सरकार ने एक भूमि सौदे की जांच के बाद उन्हें क्लीन चिट भी दे दी है। लेकिन इंडिया अगेंस्ट करप्शन की राय है कि मामले की जांच फिर से होनी चाहिए।

कैसे रचा गया गोरखधंधा

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अखबार ने अपनी जांच में पाया कि 44 वर्षीय वाड्रा को रियल एस्टेट का पहले कोई अनुभव नहीं था। वर्ष 2012 में उन्होंने 12 मिलियन डॉलर की रियल एस्टेट संपत्ति बेची। अब भी उनके पास 42 मिलियन डॉलर की संपत्ति है। वर्ष 2004 से 2007 तक वाड्रा का बिजनेस बेहद मामूली था और वह सस्ती ज्वैलरी का निर्यात करते थे।

2007 में उन्होंने 2000 डॉलर के निवेश से स्काई लाइट हास्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाई। 2008 में कंपनी ने गुड़गांव में 3.5 एकड़ कृषि भूमि 1.3 मिलियन डॉलर में खरीदी। हरियाणा की कांग्रेस सरकार ने 18 दिन के अंदर इसे कृषि से व्यावसायिक भूमि उपयोग की अनुमति दे दी और जमीन बेशकीमती हो गई। अगले चार साल में रियल एस्टेट की दिग्गज कंपनी डीएलएफ ने वाड्रा को खासी रकम दी और कंपनी की बैलेंस शीट में इसे एडवांस बताया।

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