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अब कांग्रेस को भी हुआ दर्द का अहसास
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 04 Dec 2012 10:41 PM IST
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रियायती रसोई गैस सिलेंडरों की संख्या छह पर सीमित करने के सरकार के निर्णय का सिर्फ विपक्षी दल ही विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि कांग्रेस को भी अब इस कटौती के दर्द का अहसास होने लगा है।
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लोकसभा में मंगलवार को कांग्रेस के एक सदस्य ने सरकार से रियायती दर वाले रसोई गैस सिलेंडरों की राशनिंग किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार करने का सुझाव दिया। सत्तारूढ़ दल की ओर से आए इस सुझाव का विपक्षी सदस्यों ने भी जमकर समर्थन किया। कांग्रेस सांसद ने रियायती रिलेंडरों की संख्या छह से बढ़ाकर कम से कम 12 करने की अपील की है। उनका कहना है कि एक परिवार में प्रति माह कम से कम एक सिलेंडर लगता है।
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शून्यकाल में कांग्रेस के जगदंबिका पाल ने सदन में एलपीजी का मामला उठाते हुए कहा कि रसोई गैस सिलेंडरों की संख्या सीमित करने का फैसला निश्चित तौर पर परेशानी पैदा करने वाला है। खासकर उन लोगों के लिए और भी कष्टदायक है जो पहाड़ो पर रहते हैं।
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सिलेंडरों की राशनिंग करने से जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के लोगों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि यहां खाना बनाने के अलावा कड़ाके की ठंड से बचने के लिए भी एलपीजी गैस का इस्तेमाल होता है। पाल से सरकार से अनुरोध किया कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए।
उन्होंने बताया कि जब से सिलेंडरों राशनिंग और तेल कंपनियों को गैर रियायती सिलेंडरों के दाम तय करने की आजादी मिली है तब से बाजार में रसोई गैस की कालाबाजारी बढ़ गई है। बाजार में 950 रुपये वाला सिलेंडर ब्लैक में 1100 से 1500 रुपये तक बिक रहा है।
पाल ने कहा कि एक आवासीय पते पर एक ही कनेक्शन पर रियायती सिलेंडर उपलब्ध कराने की तेल कंपनियों की नई नीति से भी जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है, क्योंकि एक मकान में कई-कई परिवार रहते हैं। तृणमूल कांग्रेस और भाजपा जैसी विपक्षी पार्टियों ने पाल की बात का समर्थन किया।