महाराष्ट्र में हाथी के सहारे 'अच्छे दिन' की आस में कांग्रेस
बहुजन समाज पार्टी का हाथी इस बार महाराष्ट्र में भी दौड़ सकता है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने संकेत दिया है कि विधानसभा चुनाव में बसपा सुप्रीमो मायावती और भारिप बहुजन महासंघ के अध्यक्ष डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाती प्रकाश आंबेडकर के साथ गठबंधन की चर्चा शुरू है।
महाराष्ट्र में कांग्रेस पहली बार बसपा से समझौते की फिराक में है। लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में बसपा ने राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और आम आदमी पार्टी को भी पीछे छोड़ दिया था।
नए समीकरणों की सुगबुगाहट
बसपा को राज्य में 12 लाख 71 हजार यानी 2.6 फीसदी मत मिले थे, जबकि मनसे को 1.4 फीसदी और आप को 2.2 फीसदी मत हासिल हुए थे। हालांकि बसपा का महाराष्ट्र में खाता नहीं खुला लेकिन उसके कई उम्मीदवार लड़ाई में तीसरे स्थान पर थे।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और बसपा दोनों को भाजपा ने जोर का झटका दिया है। ऐसे में दुश्मन के दुश्मन को दोस्त बनाने की पहल रंग ला सकती है।
बसपा के साथ गठबंधन होने पर महाराष्ट्र में कांग्रेस की सत्ता में बने रहने की तमन्ना भले ही न पूरी हो लेकिन इस प्रदेश में बसपा का खाता जरूर खुल सकता है। मुख्यमंत्री चव्हाण मानते हैं कि बसपा से गठबंधन होने पर कांग्रेस विदर्भ में अच्छा प्रदर्शन कर सकती है।
11 जिलों में बसपा का जनाधार है
विदर्भ की सभी 10 लोकसभा सीटें भाजपा-शिवसेना ने जीती हैं जबकि कांग्रेस-एनसीपी बुरी तरह पिट चुकी हैं। मालूम हो कि महाराष्ट्र में विदर्भ के 11 जिलों में बसपा का जनाधार है, इसलिए कांग्रेस के साथ गठबंधन बसपा के लिए भी फायदे का सौदा होगा।
लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र के 35 जिलों में से सिर्फ चार जिलों में ही कांग्रेस को बढ़त मिली है। इस लिहाज से अक्तूबर में संभावित विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को अपनी दुर्गति का आभास है। इसलिए न केवल कांग्रेस बल्कि एनसीपी भी हाथी से हाथ मिलाने के लिए आतुर हैं।