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तो इसलिए पासवान ने थामा NDA का दामन

Sat, 01 Mar 2014 12:13 PM IST
Updated Sat, 01 Mar 2014 12:13 PM IST
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congress leaders ignore rahul advice for ramvilas paswan

राम विलास पासवान के भाजपा के साथ जाने से कांग्रेस को जबर्दस्त झटका लगा है।

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हालाकि हकीकत यह भी है कि राहुल गांधी के निर्देश के बावजूद पासवान को भाजपा के साथ जाने से रोकने के लिए कोई भी कांग्रेसी नेता उनसे बातचीत करने नहीं गया। जबकि पासवान करीब दो घंटे तक इंतजार करते रहे।

यह जानकारी देने वाले सूत्रों का कहना है कि इसके बाद पासवान ने भाजपा के साथ जाने की अपने परिवार की जिद को मंजूरी दे दी।

राहुल ने तुरंत की पहल

congress leaders ignore rahul advice for ramvilas paswan

बताया जाता है कि जैसे ही रामविलास पासवान के भाजपा से बातचीत करने और एनडीए में शामिल होने की खबर टीवी चैनलों पर आई, बिहार से जुड़े और दस जनपथ के करीब माने जाने वाले एक कांग्रेस नेता ने राहुल गांधी को इसकी जानकारी दी।

राहुल उस समय असम में थे। उन्होंने फौरन उक्त नेता को जवाब दिया कि कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता पासवान के घर जाकर उनसे बात करके उन्हें एनडीए में जाने से रोकें।

राहुल ने उक्त वरिष्ठ नेता का नाम भी बता दिया। इसकी सूचना बिहार से जुड़े उक्त कांग्रेस नेता ने पासवान को देते हुए कहा कि राहुल ने खुद यह पहल की है।

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खफा हो गए पासवान

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इसके बाद पासवान अपने घर पर शाम को तय समय पर करीब दो घंटे तक इंतजार करते रहे। लेकिन पासवान से बात करने की जिम्मेदारी जिन्हें दी गई थी न वह पहुंचे और न ही उनका कोई संदेश पहुंचा।

इधर राहुल से भी संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद खफा पासवान ने अपने बेटे चिराग पासवान, भाई रामचंद्र पासवान और पशुपति पारस की जिद के आगे हथियार डाल दिए।

सूत्रों के मुताबिक रामविलास पासवान की खुद की इच्छा कांग्रेस और राजद के साथ गठबंधन में रहने की थी। लेकिन लालू यादव बिहार में कांग्रेस और लोजपा के लिए 16 से ज्यादा सीटें छोडऩे को तैयार नहीं थे।

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सीटों को लेकर नहीं बनी बात

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साथ ही उन्होंने कांग्रेस से कहा कि वह इन 16 सीटों में से सिर्फ तीन सीटें ही पासवान के लिए छोड़े। जबकि पासवान आठ सीटें मांग रहे थे और छह से कम पर किसी कीमत पर राजी नहीं थे।

लालू और पासवान के बीच लोजपा के कुछ उम्मीदवारों को लेकर भी विवाद था। पासवान लोजपा से कुछ बाहुबलियों को लड़ाना चाहते थे, जिसके लिए लालू और कांग्रेस को एतराज था।

चिराग का दबाव काम आया

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लालू और कांग्रेस के साथ इसी रस्साकसी के बीच चिराग पासवान ने भाजपा से तार जोड़े और जब उधर से सकारात्मक संकेत मिले तो पासवान का पूरा परिवार और पार्टी के नेता एनडीए में जाने की जिद ठान बैठे।

जबकि पासवान का कहना था कि वह भाजपा और नरेंद्र मोदी के विरोध में इस हद तक जा चुके हैं कि उनके लिए वापस एनडीए में जाना बहुत मुश्किल होगा।

सूत्रों के अनुसार इसी रस्साकसी के बीच एक दिन पासवान रात में अपने घर से दूर किसी रिश्तेदार के यहां भी चले गए थे। उन्हें आशंका थी कि कहीं पिछली बार की तरह सोनिया गांधी सीधे उनके घर न पहुंच जाएं।

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