जाते-जाते वाघेला ने ताने कसते हुए दी मोदी की विदाई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुजरात विधानसभा में बुधवार को नरेंद्र मोदी को अपने पुराने दोस्त और अब राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी शंकरसिंह वाघेला से जहां तारीफ मिली, वहीं दूसरी ओर उनके ताने भी सहने पड़े। विशेष विदाई सत्र में वाघेला ने मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया और शॉल पहनाई।
अपने भाषण में कांग्रेस नेता ने उनकी तुलना मोरारजी देसाई से की और कहा कि उन्होंने गुजरात का मान बढ़ाया है। साथ ही कहा कि उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने को साकार किया है।
'राम मंदिर का निर्माण कर ही देना चाहिए'
वह केवल भाजपा के नहीं बल्कि पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं और उनसे सारी समस्याओं के समाधान की उम्मीद है।
साथ ही ताना कसते हुए कहा कि मोदी को अब अयोध्या में संविधान के दायरे में रखकर राम मंदिर का निर्माण कर ही देना चाहिए क्योंकि अब उनके पास पूर्ण बहुमत है। हालांकि वाघेला के इस बयान के चलते कांग्रेस को शर्मिंदगी भी उठानी पड़ सकती है।
मोदी पर हमला बोलते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि जब लालकृष्ण आडवाणी ने रथ यात्रा शुरू की थी तो भाजपा अपने चरम पर थी लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी को सत्ता में रहते सहयोगी दलों की वजह से समझौता करना पड़ा था।
तारीफ के बांधे पुल
अब भाजपा को अपने दम पर बहुमत हासिल हुआ है और यदि एनडीए भी साथ देता है तो अच्छा है। मोदी को अब संविधान के दायरे में रहकर अयोध्या में राम मंदिर बना ही देना चाहिए। साथ ही यूनिफार्म सिविल कोड और कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के काम भी पूरा करना चाहिए।
1996 में भाजपा से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाघेला ने कहा कि गोधरा ने गुजरात के दो व्यक्तियों की जिंदगी में अहम भूमिका निभाई। गोधरा दंगों के दौरान डिप्टी कलेक्टर रहे मोरारजी देसाई भी प्रधानमंत्री बने और अब मोदी भी।
वाघेला ने महंगाई 25 फीसदी कम करने, योग गुरु रामदेव के आधीन कमेटी बनाकर काला धन लाने और नर्मदा बांध, गैस कीमत जैसे मुद्दों को लेकर भी तंज कसा।
मोदी ने अपने जवाब में वाघेला के साथ काम करने का वक्त याद दिलाया और कहा कि हम दोनों ने मोटरसाइकिल पूरे गुजरात का दौरा किया। वह उनकी चिंताओं का ध्यान रखेंगे।
मोदी बोले, कोई फाइल लंबित नहीं छोड़ी
आनंदी बेन पटेल के गुजरात की नई सीएम चुने जाने के बाद मोदी ने पार्टी विधायकों से कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और अब वह पूर्व सीएम हैं लेकिन उन्होंने कोई भी फाइल लंबित नहीं छोड़ी है।
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार में व्यस्त होने के बावजूद देर रात वापस आकर अफसरों को बुलाकर अपना काम निपटाता था।