बीमा, जीएसटी और भूमि अधिग्रहण बिलों का विरोध करेगी कांग्रेस
सोमवार को शुरू होने जा रहे संसद के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस राजनीतिक पारा चढ़ाने की तैयारी में है। दरअसल, सरकार की ओर से पेश होने जा रहे बिलों की सूची में लगभग आधा दर्जन से ज्यादा बिलों को लेकर कांग्रेस अड़ंगा फंसाने की तैयारी में है।
कई बिलों को लेकर तो कांग्रेस सहमत थी। मगर अब पार्टी अपने पुराने रुख से पलट कर सरकार के सामने टकराव लेने के लिए तैयार है।
सूत्रों का कहना है कि बीमा अधिनियम, भूमि अधिग्रहण और यहां तक कि वस्तु एवं सेवा कर विधेयक यानी जीएसटी बिल को लेकर कांग्रेस अपने पुराने रुख को बदल सरकार का विरोध करने जा रही है। इन तीनों बिल का यूपीए सरकार के समय कांग्रेस समर्थन कर रही थी। मगर सत्ता में आते ही अब विरोध की राजनीति पर पार्टी उतरने के संकेत दे रही है।
दूसरी तरफ कोयला आवंटन से संबंधित कोल माइंस (स्पेशल प्रोविजन) अध्यादेश के रास्ते भी रोड़े फंसाने की तैयारी है। लोकपाल अधिनियम में संशोधन और श्रम सुधारों से संबधित विधेयक को लेकर भी कांग्रेस विरोध करने के मूड में है।
सत्र के पहले तैयार होगी विरोध की रूपरेखा
सत्र से ठीक पहले कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक में विरोध की रूप रेखा तैयार की जाएगी। लोकसभा में विपक्ष के नेता का दर्जा नहीं देने को लेकर कांग्रेस में काफी गुस्सा है। मल्लिकार्जुन खड़गे लोकसभा में विपक्ष के नेता के लिए तय कुर्सी पर बैठेंगे। लेकिन उन्हें प्रतिपक्ष के नेता का दर्जा नहीं मिलेगा।
कांग्रेस को बैकफुट पर रखने के सरकार के रुख का पार्टी कड़ा जवाब देने की तैयारी में है। बीमा बिल को लेकर गठित सेलेक्ट कमेटी के कार्यकाल बढ़ाने की बात कांग्रेस ने शुरू कर दी है। इसे बीमा बिल को टाले जाने के संकेत माने जा रहे हैं।
सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस नेता आनंद शर्मा का कहना है कि बिल पर कमेटी के अंदर विस्तार से चर्चा नहीं हो पाई है। भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक और कोयला आवंटन से संबंधित कोल माइंस (स्पेशल प्रोविजन) अध्यादेश के मुद्दे पर भी कांग्रेस सरकार से रुख स्पष्ट करने की बात कह रही है।