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जीएसटी पर दबाव में कांग्रेस, सरकार के साथ विपक्षी दल

Mon, 14 Dec 2015 05:49 AM IST
Updated Mon, 14 Dec 2015 05:49 AM IST
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 Congress is in pressure on GST  ,  majority of the opposition with government

सरकार आर्थिक सुधारों से जुड़े वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और रियल स्टेट जैसे अहम बिलों को संसद के मानसून सत्र के तीसरे हफ्ते में कानूनी जामा पहनाने की कोशिश करेगी। दरअसल, नेशनल हेराल्ड मामले में संसद में अपनाए गए रुख पर चौतरफा आलोचना झेलने के बाद कांग्रेस दबाव में है।

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सरकार को उम्मीद है कि इस दबाव में आई कांग्रेस इन विधेयकों का समर्थन कर सकती है। इसके लिए सरकार के रणनीतिकार सोमवार को कांग्रेस का मूड भांपने की कोशिश करेंगे। सपा, बसपा, बीजेडी, जदयू, टीआरएस, अन्नाद्रमुक और राकांपा की ओर से सकारात्मक रुख के बाद सरकार की निगाहें अब कांग्रेस पर टिकी है।
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चूंकि जीएसटी संविधान संशोधन बिल है और इसे पारित कराने के लिए दो तिहाई सदस्यों का समर्थन अनिवार्य है। ऐसे में इन बिलों को कानूनी जामा पहनाने के लिए राज्यसभा में कांग्रेस का समर्थन हासिल करना सरकार के लिए अनिवार्य है। सरकार के रणनीतिकारों का कहना है कि जीएसटी पर टीएमसी ने भी अब तक अपना रुख साफ नहीं किया है, जबकि वाम दल सार्वजनिक तौर पर बिल के खिलाफ हैं।
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सरकार ने उम्मीद नहीं छोड़ी है

 Congress is in pressure on GST  ,  majority of the opposition with government

दरअसल, नेशनल हेराल्ड मामले में संसद की कार्यवाही बाधित करने पर कांग्रेस को चौतरफा आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर वह विपक्ष को एकजुट करने के बदले ऐसे दलों की भी आलोचना झेल रही है। बदली परिस्थितियों में कांग्रेस को लगातार सफाई देनी पड़ रही है।

सरकार के रणनीतिकारों का कहना है कि चूंकि कांग्रेस फिलहाल रक्षात्मक और विपक्ष में अलग-थलग है, इसलिए सरकार ने आर्थिक सुधारों से जुड़े बिलों पर समर्थन के लिए उससे बातचीत का फैसला किया है। हालांकि, नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व जिस प्रकार हमलावर है, उससे बातचीत के सकारात्मक रहने की उम्मीद बेहद कम है।

मगर रणनीतिकारों का कहना है कि अगर बातचीत नाकाम रही तो वह एक बार फिर से कांग्रेस पर संसद का कामकाज बेवजह बाधित करने और विकास का रास्ता रोकने का आरोप लगा सकते हैं। मगर मुश्किल राज्यसभा में कांग्रेस का संख्या बल है। जब तक कांग्रेस बिल के पक्ष में खड़ी नहीं होती तब तक संविधान संशोधन वाला एक भी बिल सरकार उच्च सदन में पारित नहीं करा पाएगी। जीएसटी और रियल स्टेट के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर सरकार के रणनीतिकारों में शामिल एक राज्य मंत्री ने कहा कि बिल पारित होने का पक्का भरोसा तो नहीं है, मगर सरकार ने उम्मीद भी नहीं छोड़ी है।

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