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राहुल की फीकी रैलियों से 'टेंशन' में कांग्रेस

Tue, 19 Nov 2013 08:19 AM IST
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, दिल्ली
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 19 Nov 2013 08:19 AM IST
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congress in tension about rahul's flop rally

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की रैलियों में भीड़ घटने से पार्टी आलाकमान सकते में है। बीते रविवार को दिल्ली और उससे पहले अन्य राज्यों में हुई राहुल की फीकी रैलियों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।

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इस बारे में पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेता खुलकर तो नहीं, मगर दबी जुबान में गंभीर चर्चा कर रहे हैं। चिंता की बात यह है कि चुनावी राज्यों में खुद पार्टी के उम्मीदवार राहुल सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की रैलियों की मांग नहीं कर रहे हैं।
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उन्हें डर है कि बड़े नेताओं की रैलियों के कारण स्थानीय मुद्दों के दबने और पूरा चुनाव राहुल बनाम मोदी का रूप ले लेने से लेने के देने पड़ सकते हैं।

कांग्रेस के रणनीतिकार अचानक उपजी इस नई राजनीतिक परिस्थिति का मुकाबला करने के लिए रणनीति बनाने में व्यस्त हैं। इस पर खासतौर से विचार हो रहा है कि क्या इन परिस्थितियों में अब तक सांकेतिक उपस्थिति दिखा रहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की रैलियों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ राहुल की रैलियों की संख्या में कुछ कमी की जाए?
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बीते रविवार को दिल्ली में हुई राहुल की रैली में मामूली भीड़ थी। राहुल के भाषण से ठीक पहले जब यह भीड़ भी छंटने लगी तो मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को लोगों से राहुल के भाषण तक रुकने की अपील करनी पड़ी।

यही नहीं छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी राहुल की रैलियों का भीड़ की दृष्टि से कुछ ऐसा ही आलम था। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अब कई उम्मीदवार ऐसे हैं जो चाहते हैं कि उनके क्षेत्र में बड़े नेताओं की रैली न हो।

इनका तर्क है कि इससे स्थानीय मुद्दे, जिनमें कांग्रेस भाजपा पर भारी है, गौण होते जा रहे हैं। खासतौर पर जहां राहुल और मोदी की जनसभाएं हो रही हैं, वहां स्थानीय मुद्दों की जगह चर्चा दोनों की नेतृत्व क्षमता पर हो रही है। इससे स्थानीय उम्मीदवारों को अपना खेल बिगड़ने का डर सता रहा है।

सूत्रों के मुताबिक अब इस नई परिस्थिति की काट ढूंढने के लिए पार्टी के रणनीतिकार माथापच्ची में जुटे हैं। सोनिया सत्ता का सेमीफाइनल माने जा रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में प्रचार की लगभग रस्म अदायगी कर रही हैं। कहा जा रहा है कि स्वास्थ्य कारणों से सोनिया ताबड़तोड़ रैलियों से बच रही हैं।


अब पार्टी के रणनीतिकार यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि ऐसी स्थिति में राहुल की रैलियों की संख्या कम की जाय या फिर सोनिया की सक्रियता बढ़ाई जाए। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बारे में अंतिम फैसला राहुल की कुछ और जनसभाओं के बाद लिया जाएगा।

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