बुखारी के फरमान से कांग्रेस को होगा ये फायदा
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जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी के कांग्रेस के पक्ष में खुलकर मुस्लिम समाज से वोट मांगने को आधार बनाकर पार्टी अब धर्मनिरपेक्षता की पिच पर भाजपा को पीछे धकेलने में जुट गई है।
पार्टी अंदरखाने शाही इमाम के रुख से खुश है। पार्टी नेता दबी जुबान में उम्मीद जता रहे हैं कि उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कुछ दिनों बाद होने वाले मतदान में इमाम की अपील से पार्टी के पक्ष में सकारात्मक माहौल बनेगा।
खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों में अल्पसंख्यकों के वोटों का धुव्रीकरण पार्टी के पक्ष में होने की कांग्रेस को आस है।
भाजपा के आरोपों को लेकर कांग्रेस सतर्क
शुक्रवार को पार्टी ने खुलकर कहा कि कांग्रेस की हमेशा से कोशिश रही है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अल्पसंख्यकों की भागदारी सुनिश्चित हो। मगर पार्टी भाजपा के आरोपों को लेकर भी सतर्क है।
भाजपा ने बुखारी और सोनिया गांधी की मुलाकात को आधार बनाकर कांग्रेस अध्यक्ष पर धर्म के आधार पर वोट मांगने का आरोप लगाया है।
इमाम की कांग्रेस के पक्ष में अपील का पार्टी खुलकर स्वागत नहीं कर रही है। बेहद सावधानी भरे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ताकि दूसरे समुदाय में इसका गलत संदेश न जाए। पार्टी ने खुद को देश की सबसे बड़ी धर्मरिनापेक्ष पार्टी बताते हुए भाजपा पर सांप्रदायिकता की राजनीति करने का आरोप लगाया है।
मोदी और भाजपा पर ही लगाया आरोप
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला कहते है कि किसी भी धर्मगुरु को किसी भी पार्टी के समर्थन में अपने लोगों से अपील करने का अधिकार है।
पार्टी ने सफाई दी है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने कभी धर्म के नाम पर वोट देने की अपील नहीं की। सुरजेवाला ने कहा कि इमाम बुखारी पार्टी अध्यक्ष से मिले थे। सोनिया गांधी सभी धर्मों के नेताओं से समय-समय पर मिलती है।
सुरजेवाला ने कहा कि नरेंद्र मोदी भी हाल में बाबा रामदेव के एक कार्यक्रम में शिरकत करने गए थे। पार्टी ने सफाई दी है कि सोनिया या कांग्रेस के किसी नेता ने धर्म के आधार पर वोट नहीं मांगा है, जबकि मोदी और भाजपा ने कई बार ऐसा किया है।