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चिराग की लगाई आग पर पानी डालने में जुटी कांग्रेस

Tue, 25 Feb 2014 10:34 AM IST
Updated Tue, 25 Feb 2014 10:34 AM IST
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congress engage in persuading to paswan

लोकसभा चुनावों में गठबंधन की सियासत में पिछड़ रही कांग्रेस लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के मुखिया रामविलास पासवान को अपने साथ बांधे रखने की कोशिश में जुटी हुई है। कांग्रेस ने रामविलास पासवान के साथ पर्दे के पीछे से बातचीत जारी रखी है।

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जूनियर पासवान यानी चिराग पासवान के नरेंद्र मोदी पर नरम रुख दिखाने के साथ ही कांग्रेस ने सीनियर पासवान से संपर्क साधा है। पार्टी ने लालू यादव के साथ भी सीट बंटवारे के मुद्दे पर बातचीत की है।
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कांग्रेस लालू और पासवान के बीच मनमुटाव को खत्म कराने के लिए भी सक्रिय हो गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता उम्मीद जता रहे हैं कि पासवान भाजपा के साथ नहीं जाएंगे। पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि सीट बंटवारे में मोल-भाव की रणनीति के तहत पासवान की पार्टी मोदी पर नरम रुख अपना रही है।

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लालू से कुछ और सीटें झटकने का पासवान का पैंतरा!

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भाजपा से नजदीकी के लोजपा के संकेतों को देखकर कांग्रेस सकते में है। पार्टी के रणनीतिकार मान रहे हैं कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पासवान के एनडीए से जुड़ने से सिर्फ बिहार में नहीं बल्कि देशभर में पार्टी के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनेगा। मगर साथ ही पार्टी के मैनेजर इसे पासवान की लालू यादव से कुछ और लोकसभा सीटें झटकने का पैंतरा मान रहे हैं।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ महासचिव ने तो यहां तक कहा कि पासवान का एनडीए में जाने का सवाल पैदा नहीं होता। कुछ दिन में विवाद सुलझा लिया जाएगा और चिराग पासवान की मोदी के प्रति दिखाई नरमी को उनका निजी बयान कहकर सीनियर पासवान पल्ला झाड़े लेंगे।

'कोरी अटकल है पासवान और भाजपा का गठजोड़'

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कांग्रेस ने रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के भाजपा के साथ जाने की खबरों को कोरी अटकलबाजियां करार दिया है। पार्टी ने कहा है कि पासवान लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठजोड़ नहीं करेंगे। यह पासवान ही थे, जिन्होंने गुजरात दंगों के मुद्दे पर सबसे पहले एनडीए का साथ छोड़ा था।

कांग्रेस प्रवक्ता और सूचना-प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि अगर इस तरह की खबरें आ रही हैं तो मेरा मानना है कि यह अटकलबाजियों के सिवा कुछ नहीं है।

उन्होंने पासवान का जिक्र करते हुए कहा कि जिस शख्स ने गुजरात दंगों के सवाल पर सरकार से बाहर रहने का फैसला किया हो उसके लिए इस तरह यू टर्न लेना मुश्किल होगा, क्योंकि आज भी गुजरात दंगों से जुड़े सवाल अनसुलझे हैं। दंगा पीड़ितों को अब तक न्याय नहीं मिला है।

पासवान ने गुजरात दंगे के मुद्दे पर उस दौर में एनडीए छोड़ दी थी, जब बहुत सारे लोग सचाई जानते हुए भी इसमें बने हुए थे। लोक जनशक्ति पार्टी एनडीए सरकार की सहयोगी थी लेकिन 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए गुजरात के दंगों के सवाल पर उन्होंने गठबंधन छोड़ दिया था। उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

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