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अपनी इन दो योजनाओं को छिपा क्यों रही है कांग्रेस?

Sun, 11 May 2014 08:23 AM IST
Updated Sun, 11 May 2014 08:23 AM IST
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Congress doesn't talk about his two scheme during election campaign

लोगों की भलाई के नाम पर तामझाम के साथ शुरू की गई यूपीए दो सरकार की ज्यादातर बड़ी योजनाएं कांग्रेस के पूरे चुनाव प्रचार अभियान से गायब रही हैं।

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इन योजनाओं के बदौलत चुनाव में जीत की आस लगा रही कांग्रेस में एक बड़ा तबका मानता है कि इनसे ही पार्टी को लेकर नकारात्मक माहौल बना। सरकार की इन योजनाओं की वजह से ही मध्यम वर्ग नाराज हुआ।
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हालांकि, कार्यकाल के अंतिम महीनों में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को यह बात समझ आई तो उसने अपने चुनाव प्रचार अभियान में इनमें से किसी योजना का जिक्र करना मुनासिब नहीं समझा।

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स्कीम की व‌िफलता बनी मुसीबत

Congress doesn't talk about his two scheme during election campaign

पार्टी का एक वर्ग मानता है कि आधार कार्ड, सीधे नकद सब्सिडी, केबल डिजीटलीकरण, रसोई गैस सिलेंडर को सीमित करना समेत कई योजना अगर लागू नहीं की जाती तो आज तस्वीर कुछ और होती।

पार्टी के कई बड़े नेता इन योजनाओं की विफलता के लिए सीधे मनमोहन सिंह सरकार को जिम्मेदार मानते हैं। पार्टी के कई नेता मानते हैं कि यूपीए सरकार की ओर से लोगों को एक विशिष्ट पहचान के नाम पर दिए गए आधार कार्ड के वजूद पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने खुद लोगों को यह कार्ड सौंपकर इसकी शुरुआत की थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने इसके वजूद पर सवाल उठा दिया। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि ये 12 हजार करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट मध्य वर्ग पर बोझ माना जाता है।

दोनों बड़ी योजनाएं

Congress doesn't talk about his two scheme during election campaign

फिर सरकार ने एक और गेम चेंजर का दांव खेला। लोगों के बैंक खाते में सीधे नकद के तौर पर सब्सिडी देने की योजना आपका पैसा आपके हाथ के नारे के साथ दी।

इस योजना के खातिर मध्य वर्ग ने पहले रसोई गैस के कनेक्शन को आधार कार्ड से जोड़ा फिर बैंक के खाते को आधार कार्ड से जोड़ने के लिए दस्तावेज जमा कराए। लोगों ने दफ्तर के कई चक्कर काटे। मजबूरी में रसोई गैस के सिलेंडर बाजार दाम में खरीदे।

कइयों के तो बैंक खातों सब्सिडी ही जमा नहीं हुई। सरकार की केबल डिज‌िटलीकरण योजना भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रही है।

सस्ते अनाज के चक्कर में लोगों ने काटे चक्कर

Congress doesn't talk about his two scheme during election campaign

साफ सुथरी और उम्दा क्वालिटी की तस्वीर टीवी पर देखने के नाम पर लोगों की केबल टीवी का खर्च जो 100 रुपये होता तो वह आज 250 रुपये से ज्यादा का हो गया है। इसके बाद सरकार का खाद्य सुरक्षा कानून आया।

लोगों को फिर सस्ते अनाज लेने के चक्कर में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े। खाद्य सुरक्षा कार्ड बनाने के लिए पुलिस की लाठियां खानी पड़ी। इस योजना से सरकारी खजाने पर लगभग सवा लाख करोड़ का बोझ माना जाता है।

जिसकी भरपाई सीधे मध्य वर्ग से टैक्स वसूल कर की जानी है। रसोई गैस के सिलेंडरों की संख्या साल में नौ और फिर 12 करने से भी मध्य वर्ग हताश रहा।

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