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जासूसी कांड की जांच पर कांग्रेस में जबरदस्त घमासान

Tue, 06 May 2014 08:11 AM IST
Updated Tue, 06 May 2014 08:11 AM IST
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Congress divided in gujrat snooping case

महिला जासूसी कांड के मुद्दे पर एक बार फिर से मुंह की खाने के बाद कांग्रेस और सरकार के बीच गंभीर मतभेद सामने आ गए है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के ऐतराज के बावजूद सरकार सार्वजनिक तौर पर इस मामले पर आगे बढ़ी।

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पार्टी के कई शीर्ष नेता इस फजीहत के लिए कानून मंत्री कपिल सिब्बल और केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

सूत्र संकेत दे रहे हैं कि पार्टी हाईकमान इस मामले को लेकर बेहद नाराज है और इस फजीहत के लिए जिम्मेदार मंत्रियों को आगे चलकर हाशिये पर डाला जा सकता है।

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मंत्रियों का उत्साह पड़ा भारी

Congress divided in gujrat snooping case

पार्टी के शीर्ष नेताओं का मानना है कि जांच आयोग के अध्यक्ष के तौर पर कोई योग्य जज नहीं मिलने का कोई मुद्दा नहीं था।

दरअसल, शुरू से ही इस मसले पर सरकार के अंदर और पार्टी से जबरदस्त मतभेद था। मगर सरकार के कुछ उत्साही मंत्रियों ने इस पर आगे बढ़ने की जिद कर ली।

महिला जासूसी कांड ही नहीं बल्कि खाद्य सुरक्षा कानून, भ्रष्टाचार निरोधक बिल, लोकपाल की नियुक्ति, न्यायिक जवाबदेही विधेयक समेत तमाम मुद्दों पर सरकार के बड़े मंत्रियों से कांग्रेस को फजीहत का सामना करना पड़ा है।

प्रियंका के हमले के बाद कांग्रेस हुई थी हमलावार

Congress divided in gujrat snooping case

पार्टी के शीर्ष मैनेजरों का मानना है कि सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने अति उत्साह में नरेंद्र मोदी को एक बार फिर कांग्रेस को कोसने का सुनहरा मौका दे दिया है। प्रियंका गांधी ने जिस तरह से मोदी को घेरने की कोशिश की थी।

उसके बाद कांग्रेस के प्रचार अभियान में तेजी आई थी। पार्टी मोदी के खिलाफ खुलकर सियासी निशाना साध रही थी।

मगर महिला जासूसी कांड की फाइल खोलकर सरकार ने खुद ही मुसीबत मोल ले ली। सलमान खुर्शीद, अभिषेक मनु सिंघवी, पी चिदंबरम ने इसका विरोध भी किया था।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस मामले में कोई योग्य न्यायाधीश नहीं मिलना तो कोई मुद्दा ही नहीं था। जब ये मामला कैबिनेट में आया तो तब भी कई मंत्रियों ने इसका विरोध किया।

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कोई जज नहीं था तैयार

Congress divided in gujrat snooping case

ए के एंटनी, शरद पवार और वीरप्पा मोइली इसके पक्ष में नहीं थे। जबकि कुछ दिन पहले कपिल सिब्बल ने जज की नियुक्ति करने की बात कही तो तब भी इसका विरोध किया गया।

मंत्रियों को समझाया गया कि था कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी इस संबंध में सहमत नहीं होंगे। मगर उत्साही मंत्री रुकने के लिए तैयार नहीं थे।

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