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गुजरात दंगा: सोनिया को जाकिया जाफरी से मिलने से किसने रोका?

Mon, 28 Dec 2015 04:30 PM IST
Updated Mon, 28 Dec 2015 04:30 PM IST
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'Congress didn’t let Sonia meet Zakia Jafri after riots'

वर्ष 2002 में गुजरात में हुए दंगों के समय कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी, दंगों में मारे गए कांग्रेस के सांसद एहसान जाफरी की पत्नी मिलने वाली थी। पर पार्टी के बड़े नेताओं ने उन्हें मिलने से रोक दिया। इस बात का खुलासा रिटायर्ड डीजीपी आरबी श्रीकुमार ने अपनी पुस्तक गुजरात: बिहाइंड द करटेन में किया है।

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गुजरात सरकार में अप्रैल-सितंबर, 2012 के दौरान श्रीकुमार गुजरात के खुफिया ब्यूरो के प्रमुख थे। श्रीकुमार ने अपनी पुस्तक में कांग्रेस के नेताओं का गुजरात दंगों के प्रति रूख और हिंसा में भाजपा-संघ परिवार की भूमिका की परतें खोली हैं। इससे पहले गुजरात दंगों के ऊपर वो 'इललीगल' नाम से एक पुस्तक लिख चुके हैं। इस पुस्तक में भी गुजरात के दंगों से लेकर गोधरा कांड तक के कई राज खोले गए हैं।
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'यूपीए और समाजवादी पार्टी दोनों की आलोचना भी की'

'Congress didn’t let Sonia meet Zakia Jafri after riots'

आपको बताते चलें कि श्रीकुमार अपनी नौकरी के रिटायर्ड न्यायधीश जी टी नानावती और रिटायर्ड जस्टिस अक्षय मेहता कमीशन को चार बार एफिडेविट देकर गुजरात सरकार का दंगाईयों के प्रति नरम रूख पर अपनी बात रख चुके थे। इसके बाद गुजरात सरकार ने उनके खिलाफ गोपनीय सूचना को पब्लिक में लाने का आरोप भी लगाया था। इस मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई करने पर सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर में स्टे दे दिया है।

किताब में उन्होंने कांग्रेस के उस नेतृत्व की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब कांग्रेस को गुजरात के दंगा पीड़ितों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना चाहिए था। वहीं कांग्रेस के नेताओं ने ऐसा कुछ नहीं किया और उल्टा जब सोनिया गांधी जाकिया जाफरी से मिलने की योजना बना रही थी। तो कांग्रेस के कई नेताओं ने सोनिया को जाकिया से मिलने से रोक दिया। उन्होंने गुजरात दंगों में दंगाईयों के खिलाफ कार्रवाई न करने को लेकर यूपीए और समाजवादी पार्टी दोनों की आलोचना भी की।

उन्होंने इस बात का भी आरोप लगाया की यूपीए सरकार ने उन पत्रों की कॉपी को जारी नहीं किया जो गुजरात दंगों को लेकर राष्ट्रपति के आर नारायण ने उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लिखा था।

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