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‘कांग्रेस को पसंद नहीं था मेरा हिंदुत्ववादी चेहरा’

Sat, 22 Mar 2014 07:47 AM IST
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, नई दिल्ली
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 22 Mar 2014 07:47 AM IST
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congress did not like my hindutwa face

भाजपा का दामन थाम चुके सांसद सतपाल महाराज का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व को उनका हिंदुत्ववादी चेहरा पसंद नहीं आ रहा था। शायद यही कारण है कि हर स्तर पर उपेक्षा हो रही थी।

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उन्होंने कहा कि कांग्रेस में वे घुटन महसूस कर रहे थे। प्रदेश की हरीश रावत सरकार के भविष्य को लेकर उन्होंने कहा कि वे कोई ज्योतिषी नहीं हैं कि भविष्यवाणी कर सकें कि सरकार कब तक चलेगी।
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कट्टर कांग्रेसी माने जाने वाले महाराज का चुनावी जंग के दौरान नरेंद्र मोदी के साथ आने को लेकर उत्तराखंड भाजपा के नेताओं को भनक तक नहीं लगी।

'कांग्रेस हाईकमान ने की नाइंसाफी'

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सूत्रों के अनुसार राजस्थान व गुजरात के उनके शिष्यों ने नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह के साथ महाराज की बात कराने में सूत्रधार की भूमिका निभाई। महाराज भले ही देशभर में एक धर्मगुरु के तौर पर जाने जाते हों, लेकिन उत्तराखंड खासतौर पर पौड़ी गढ़वाल में उनकी छवि दमदार ठाकुर नेता की है।

भाजपा का दामन थामने के बाद अमर उजाला से विशेष बातचीत में महाराज ने कहा कि कांग्रेस में वे अकेले धर्मगुरु थे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने शुरू से उनके साथ नाइंसाफी की। कांग्रेस को अलविदा करने के बाद उन्होंने खुलकर अपना दर्द सामने रखा। महाराज ने कहा कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के लायक भी नहीं समझा। जबकि सभी कुछ हरीश रावत को दे दिया। हरीश को प्रदेश अध्यक्ष, राज्यसभा, केंद्र में मंत्री और अब मुख्यमंत्री बना दिया। इसके अलावा स्पीकर और राज्यसभा भी उनके समर्थकों को दे दिया। जबकि उनके समर्थकों को लालबत्तियां भी नहीं दी गई।

'मोदी-राहुल में कोई तुलना नहीं'

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महाराज ने कहा कि कांग्रेस हाईकमान इसके बदले कहता रहा कि आपकी पत्नी अमृता रावत को मंत्री बनाया है। महाराज ने कहा कि वे लगातार तीन बार चुनाव जीती हैं। उन्हें अपने दम पर यह पद मिला है।

महाराज ने विजय बहुगुणा का बगैर नाम लिए कहा, ‘जिस व्यक्ति को कोई अनुभव नहीं था, उसे मुख्यमंत्री बना दिया। जबकि मैं केंद्र में रेल व वित्त मंत्रालय देख चुका था। संसदीय क्षेत्र में विकास कार्य भी नहीं होने दिये और अब जबरदस्ती चुनाव लड़ने को कहा गया।’ नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी को लेकर उन्होंने कहा कि दोनों में कोई तुलना नहीं है। मोदी के पास दृष्टि है, विकास का सपना है, एजेंडा है। अमृता रावत के भाजपा में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा पर निर्भर है, वे फैसला लेने को स्वतंत्र हैं, सिंधिया परिवार के लोग भी अलग-अलग दलों में हैं।

उन्होंने कहा कि अभी उनका लक्ष्य मोदी को प्रधानमंत्री बनाकर भारत को विकास के मामले में चीन से आगे ले जाना है, भारत को विश्व गुरु बनाना है।

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