गडकरी 'जासूसी' कांड पर घेरे में मोदी और शाह!
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केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की कथित जासूसी का मुद्दा नरेंद्र मोदी सरकार की किरकिरी का सबब बनता दिख रहा है। खुद गडकरी से लेकर गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बार-बार जासूसी की बात का खंडन करने के बावजूद सरकार का इससे पीछा नहीं छूट रहा है।
कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को तूल देते हुए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को इस मामले में लपेट दिया है।
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा है कि मोदी और शाह का लोगों की फोन टैपिंग कराने का पुराना इतिहास रहा है। इसलिए उन्हें इस बारे में जवाब देना चाहिए। सरकार पर वार करने के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी इस मसले को जोर शोर से उठाने की तैयारी कर रही है।
भाजपा-कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप
वहीं, पूरे मामले को सिरे से नकारने की नीति अपनाते हुए सरकार ने कथित जासूसी की जांच कराने से साफ इनकार कर दिया है। विपक्ष के तीखे तेवर के बीच गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दलील दी है कि खुद गडकरी ने इस घटना के इनकार कर दिया है। लिहाजा सरकार में भी कोई विरोधाभास नहीं है।
गडकरी ने भी सफाई दी कि जासूसी की ये खबरें मनगढ़ंत हैं। जासूसी जैसा कुछ भी नहीं। मगर मीडिया में सूत्रों के हवाले से खबर आई कि गडकरी के तीन मूर्ति मार्ग स्थित निवास में ही नहीं, बल्कि मुंबई स्थित फ्लैट में भी जासूसी से संबंधित उपकरण पाए गए हैं। इन खबरों से सरकार जासूसी कांड से पूरी तरह घिर गई। विपक्ष इस मुद्दे को संसद में उठाने का पहले ही ऐलान कर चुका है।
वहीं भाजपा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कांग्रेस हार की हताशा में है। इसलिए तिल का ताड़ बनाकर अपना उल्लू सीधा कर रही है।
उन्होंने कहा कि हमेशा चुप रहने वाले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उस वक्त क्यों चुप थे, जब उनके मंत्रिमंडल में मंत्री रहे चिदंबरम पर प्रणब मुखर्जी की जासूसी करवाने का आरोप लगा था।