फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   congress demand vasundhara resignation

वसुंधरा पर कांग्रेस का हल्ला बोल, मोदी की मदद के दिखाए सबूत

Wed, 24 Jun 2015 10:23 PM IST
Updated Wed, 24 Jun 2015 10:23 PM IST
विज्ञापन
congress demand vasundhara resignation

ललित मोदी मामले में घिरी राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस ने पूरी तरह मोर्चा खोल दिया है।

विज्ञापन

ललित मोदी के लिए यात्रा दस्तावेज की पैरवी से जुड़े एक और दस्तावेज के वसुंधरा सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इस दस्तावेज में कथित तौर पर राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के दस्तख्त हैं।

इस दस्तावेज के सामने आने के बाद कांग्रेस और हमलावर हो गई है। उसने कहा है कि नए दस्तावेज के खुलासे से एक भगोड़े की मदद कर रहीं वसुंधरा का पूरी तरह भंडाफोड़ हो गया है। पार्टी ने कहा है कि वसुंधरा राजे लगातार झूठ बोल रही हैं कि दस्तावेज में उन के  दस्तख्त नहीं हैं। 
विज्ञापन

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने वसुंधरा के इस्तीफे पर जोर देते हुए कहा कि पर्दा गिर चुका है और राज बाहर आ चुका है। वसुंधरा के दस्तख्त वाले दस्तावेज 18 अगस्त, 2011 के हैं। इसका मतलब यह है कि  यह मामला पूर्व की ब्रिटिश सरकार के सत्ता से बाहर होने से पहले का है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जब यह मामला पहली बार आया तभी से वह इससे इनकार कर रही हैं और कह रही हैं उन्हें इस बारे में कुछ याद नहीं। गौरतलब वसुंधरा राजे ने आईपीएल के पूर्व प्रमुख ललित मोदी के इमिग्रेशन पेपर पर गवाह के तौर पर इस शर्त पर दस्तख्त किए थे कि इसे भारत में गुप्त रखा जाएगा।

वसुंधरा के खिलाफ दिखाए सबूत

congress demand vasundhara resignation

रमेश ने कहा है कि भाजपा कहती आई है कि अगर वसुंधरा के दस्तख्त वाले दस्तावेज पेश कर दिए जाएं तो उन्हें दोषी मान लिया जाएगा। अब ऐसा दस्तावेज सामने आ चुका है और वसुंधरा का भांडा फूट चुका है। लिहाजा अब वसुंधरा को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। राजस्थान की मुख्यमंत्री ने चार कानून तोड़े हैं।

उन्होंने भारतीय दंड संहिता का उल्लंघन किया है। वह भ्रष्टाचार निरोधक कानून, पीएमएलए और पासपोर्ट कानून के उल्लंघन की दोषी हैं। इन कानूनों को उन्होंने एक भगोड़े की मदद के लिए तोड़ा है।

रमेश ने 21 बिंदुओं और सात पन्नों का दस्तावेज जारी करते हुए कि स्वतंत्र भारत में ऐसा कभी नहीं हुआ था। इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि जब कोई पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष का नेता किसी भगोड़े की मदद के लिए आगे आए।

यह एनडीए की सरकार है, मंत्रियों के इस्तीफे नहीं होते : राजनाथ

congress demand vasundhara resignation

ललित मोदी विवाद में सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे का बचाव कर रही भाजपा अब शैक्षणिक योग्यता के सवाल पर घिरीं मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी का भी बचाव करेगी। पार्टी के रणनीतिकारों का कहना है कि स्थानीय अदालत ने स्मृति को अभी कोई नोटिस नहीं दिया है।

नोटिस के बाद ही पार्टी इस पर फैसला लेगी। मोदी मंत्रिमंडल से विवादित मंत्रियों को नहीं हटाए जाने के फैसले का बचाव करते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह यूपीए की नहीं एनडीए की सरकार है।

इसमें मंत्रियों के त्यागपत्र नहीं होते। वहीं, केंद्रीय संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राजग सरकार के मंत्री यूपीए के मंत्रियों सरीखा काम नहीं करते।

सूत्रों के अनुसार, संघ नेतृत्व ने सरकार और भाजपा के शीर्ष नेताओं से दो टूक कहा है कि वे मीडिया के दबाव में आकर सियासी फैसले न लें। इसीलिए ललित मोदी विवाद को विपक्ष और मीडिया की ओर से जोरशोर से उठाने के बावजूद सरकार से लेकर संगठन तक के लोग विवादित मंत्रियों का बचाव कर रहे हैं।

सुषमा, वसुंधरा के बाद स्मृति ईरानी का भी बचाव करेगी भाजपा

congress demand vasundhara resignation

दरअसल, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मामले में मात खाने के बाद संघ नेतृत्व समझदारी से कदम बढ़ाने के पक्ष में है। भगवा रणनीतिकारों का प्रयास ललित मोदी विवाद में ही मीडिया ट्रायल को विफल करने का है। उनका मानना है कि यदि त्यागपत्र का सिलसिला शुरू हुआ तो इसकी आंच कई अन्य को अपने चपेटे में ले लेगी।

व्यापम घोटाले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की गर्दन फंसी हुई है तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह पर भी कोयला खदानों की नीलामी की कालिख लगी है। इन्हीं तमाम कारणों से भगवा परिवार के शीर्ष नेताओं में सहमति बनी है कि वे मीडिया के दबाव में आकर सियासी फैसला नहीं लेंगे।

लेकिन मुश्किल यह है कि एक मामला अभी थमता नहीं कि दूसरा सामने आ जाता है। ललित मोदी विवाद में सुषमा और राजे का मामला अभी थमा भी नहीं है कि अदालत ने स्मृति के शैक्षणिक विवाद की सुनवाई स्वीकार कर ली है।

सनद रहे कि वर्ष 2012 में भाजपा अध्यक्ष पद पर नितिन गडकरी की दोबारा ताजपोशी इस वजह से रुक गई थी कि उनकी कंपनी की अनियमितताओं को मीडिया ने बढ़ा चढ़ाकर पेश किया था। संघ नेतृत्व को आज भी उस फैसले का कसक है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed