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सोनिया ने जनार्दन द्विवेदी को दिया झटका!

Thu, 06 Feb 2014 08:45 AM IST
Updated Thu, 06 Feb 2014 08:45 AM IST
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congress clarify, caste based reservation will continue

जाति आधारित आरक्षण पर कांग्रेस के महासचिव जनार्दन द्विवेदी के बयान को लेकर सवालों में घिरी कांग्रेस और सरकार ने सफाई दी है कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में किसी तरह के बदलाव की कोई संभावना नहीं है। कांग्रेस के अंदर जाति आधारित आरक्षण को खत्म करने की आवाज को पार्टी हाईकमान ने 24 घंटे के अंदर दबा दिया है।

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने खुद सफाई दी है कि अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी वर्ग को आरक्षण देने की व्यवस्था अवश्य जारी रहनी चाहिए। सदियों से चले आ रहे दमन और जुल्म की वजह से इन वर्गों के साथ हो रहे भेदभाव को खत्म करने के लिए यह व्यवस्था बेहद जरूरी है।
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वहीं सरकार ने भी राज्यसभा में कहा है कि आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी। इसके खत्म होने का सवाल नहीं है। सोनिया के अलावा पार्टी के अंदर भी द्विवेदी के बयानों का विरोध शुरू हो गया है। अजित जोगी और पी एल पुनिया जैसे आदिवासी दलित नेताओं ने द्विवेदी के बयान का खुलकर विरोध किया है।

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पार्टियों ने कहा, दलित विरोधी है कांग्रेस

congress clarify, caste based reservation will continue

सोमवार को जाति आधारित आरक्षण को खत्म करने के द्विवेदी के बयान को लेकर कांग्रेस अलग-थलग पड़ी दिखी। समूचे विपक्ष ने द्विवेदी के इस बयान को कांग्रेस की सोच बताया। कई पार्टियों ने कांग्रेस को दलित विरोधी बताया। ऐसे में पार्टी और सरकार दोनों को सफाई देने की जरूरत पड़ गई।

खुद सोनिया गांधी को बयान देकर द्विवेदी की राय को पार्टी से अलग करना पड़ा। सोनिया ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ही 1950 में सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में आरक्षण की प्रणाली को लागू किया था। साथ ही अन्य पिछड़े वर्ग के लिए भी आरक्षण के दरवाजे कांग्रेस ने ही खोले थे। पार्टी ने निजी क्षेत्र में आरक्षण को लागू करने की वकालत की।

सोनिया ने कहा कि आरक्षण की प्रणाली पर कांग्रेस के रुख को लेकर किसी तरह का संदेह या फिर अस्पष्टता का सवाल ही नहीं है। इस प्रणाली को पार्टी ने लागू किया था। वे ही इसे और मजबूत करेगी और दलित वर्ग भी कांग्रेस को मजबूत करेगा। सोनिया से पहले पार्टी ने भी आधिकारिक मंच से कहा कि देश की संवैधानिक परिस्थितियों में आर्थिक आरक्षण संभव नहीं है।

आर्थिक आधार पर आरक्षण को लेकर मचा बवाल

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जाति आधारित आरक्षण को खत्म करने के कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी के बयान को लेकर ज्यादातर राजनीतिक दलों ने कांग्रेस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्यसभा के अंदर जहां कई दलों ने सरकार पर सवाल उठाए। वहीं, मायावती और सपा ने कांग्रेस को दलित विरोधी कहा।

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इस बयान से साफ पता लगता है कि कांग्रेस और केंद्र सरकार आरक्षण की प्रणाली को खत्म करने जा रही है।

मायावती ने कहा कि एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने आरक्षण पर बयान दिया है। यह किसी व्यक्ति विशेष की राय नहीं हो सकती बल्कि पार्टी का रुख है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।

बयान पर कांग्रेस से माफी की मांग

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उधर, समाजवादी पार्टी ने कहा कि यह आरक्षण विरोधी सोच की उपज है। कांग्रेस को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।

राज्यसभा में तो बसपा सांसदों ने द्विवेदी के बयान पर नारेबाजी भी की। बसपा सांसदों का कहना था कि ऐसी दलित विरोधी सरकार को रहने का कोई अधिकार नहीं है।

उधर, दलित नेता और लोक जनशक्ति पार्टी प्रमुख रामविलास पासवान ने कहा कि कांग्रेस नेता की टिप्पणी संविधान की भावना के खिलाफ है। इस तरह के बयान से केवल विपक्ष ही मजबूत होगा। उन्होंने कांग्रेस को इस बयान की निंदा करने की मांग की।

'अनुसूचित जाति के करोड़पति को भी नहीं मिलता सम्मान'

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सपा नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि जाति आधारित आरक्षण खत्म कर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का सुझाव देकर कांग्रेस देश में सामाजिक न्याय व्यवस्था समाप्त करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति करोड़पति है लेकिन अनुसूचित जाति या अन्य पिछड़े वर्ग का है तो उसे समाज में वह इज्जत नहीं मिल सकती, जो ऊंची जाति के अत्यंत गरीब व्यक्ति को मिलती है। इसलिए ये अंतर है और इस समय जो व्यवस्था है, वह जारी रहनी चाहिए।

अकाली दल सांसद हरसिमरत कौर ने कहा कि इस समय ऐसी बात करना सिर्फ चुनावी एजेंडा है। वहीं, भाजपा ने भी इस सुझाव के समय पर सवाल उठाया।

अपनी बात पर कायम द्विवेदी

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और सरकार के नकारने के बावजूद जाति आधारित आरक्षण की बजाय आर्थिक आधार को तरजीह देने की अपनी राय पर पार्टी महासचिव जनार्दन द्विवेदी कायम हैं।

उन्होंने कहा है कि आरक्षण की व्यवस्था जिनके लिए की गई, उनको इसका लाभ मिलना चाहिए। यही असली सामाजिक न्याय है। मौजूदा आरक्षण व्यवस्था से जिनको लाभ नहीं मिला, उन्हें लाभ मिलना चाहिए।

उन्होंने उम्मीद जताई कि समय पर मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में भी परिवर्तन होगा। द्विवेदी ने कहा कि गरीब गरीब होता है। उसकी कोई जाति नहीं होती। उसे ऊपर उठने का लाभ मिलना चाहिए। उनकी बात का विरोध कर रहे दलों को भी पार्टी महासचिव ने जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि मायावती बड़ी नेता हैं। उनके लोग विरोध कर रहे हैं। लेकिन वह बताए कि बहुजन से सर्वजन तक की उनकी यात्रा आखिर क्या है। समाजवादी पार्टी पर भी यही बात लागू होती है। वह किस तरह के सामाजिक न्याय की बात कर रहे हैं। असली न्याय तो गरीब वर्ग को ऊपर उठाने का है।

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