अपनी-अपनी कुर्सी बचाने में जुटे कांग्रेसी मुख्यमंत्री
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोकसभा चुनाव में करारी हार के बावजूद कांग्रेस में कोई जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं है।
कांग्रेस की कार्यसमिति की बैठक में केंद्रीय नेतृत्व ने जिस तरह से सामूहिक फैसले के फार्मूले के सहारे अपनी कुर्सी बचा ली, उसी तर्ज पर अब कई कांग्रेस शासित राज्य के मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी बचाने के लिए सक्रिय हो गए हैं।
कुर्सी बचाने के लिए लॉबिंग शुरू
कुर्सी छोड़ने का दिखावा कई मुख्यमंत्री कर रहे हैं। मगर पर्दे के पीछे से सामूहिक जिम्मेदारी का बहाना लगाकर अपनी कुर्सी बचाने के लिए लॉबिंग शुरू हो गई है।
दरअसल, पार्टी हाईकमान आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कई मुख्यमंत्रियों को बदलने की तैयारी में है।
उन मुख्यमंत्रियों की कुर्सी ज्यादा खतरे में है, जो लोकसभा चुनाव में नकारे साबित हुए हैं। कई मुख्यमंत्रियों को हाईकमान के इस रुख का आभास है। उन्हें चुनाव से पहले भी हाईकमान ने दो टूक कह दिया था कि उनकी कुर्सी का भविष्य उनके प्रदर्शन पर टिका है।
वीरभद्र को लेकर कांग्रेस हाईकमान सख्त
हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने केंद्रीय नेताओं से मिलकर अपनी लॉबिंग शुरू कर दी है। वह सोनिया गांधी से मुलाकात कर भी सफाई दे चुके हैं। उधर, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को लेकर कांग्रेस हाईकमान ज्यादा सख्त है।
वीरभद्र की सेहत को लेकर भी हाईकमान उन्हें हटाने के पक्ष में है। उधर महाराष्ट्र में कैबिनेट मंत्रियों और प्रदेश अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया है। अब मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण कुर्सी बचाने में जुटे हुए हैं।
कुछ मंत्री सेफ जोन
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कई विरोधियों को मंत्री पद की शपथ दिला दी हो। मगर खतरे के निशान पर वह भी हैं।
वीरभद्र की तरह वह भी अपनी पत्नी को चुनाव में नहीं जिता सके। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्घारमैया और केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी ही सुरक्षित माने जा रहे हैं। तरुण गोगोई ने तो खुद ही इस्तीफे की पेशकश कर कुर्सी बचाने की कोशिश की है।