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महंगे प्याज के सियासी चक्कर में कांग्रेस
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 25 Oct 2013 08:40 AM IST
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कभी गरीबों की थाली में सजने वाला प्याज अब राजनीतिक पार्टियों का सियासी हथियार बन गया है। लगभग डेढ़ दशक पहले प्याज का सियासी इस्तेमाल कर कांग्रेस ने दिल्ली का तख्तोताज हासिल किया था। लेकिन अब यही प्याज कांग्रेस के लिए खतरा बनता जा रहा है।
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भाजपा जहां प्याज की लगातार बढ़ती कीमतों को मुद्दा बनाकर आगामी चुनावों में वोट की फसल काटने की तैयारी कर रही है। वहीं कांग्रेस मौजूदा तेजी को भाजपा के इशारे पर जमाखोरों की करतूत बता रही है। लेकिन प्याज के सियासी खेल में आम आदमी को फिलहाल कहीं से राहत मिलती नहीं दिख रही है।
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दिल्ली में प्याज का खुदरा दाम 85 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। बृहस्पतिवार को महंगे प्याज से जनता को राहत दिलाने के उद्देश्य से दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार और खाद्य मंत्री प्रो. केवी थॉमस के साथ लंबी बातचीत की।
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हालांकि एक घंटे से ज्यादा चली बैठक के बावजूद सस्ते प्याज पर बात नहीं बन सकी। इससे निराश मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने जमाखोरों से हाथ जोड़कर कीमतें घटाने का अनुरोध किया। उन्होंने इस मामले पर चुनाव आयोग से राहत देने की बात कही है, लेकिन अभी तक चुनाव आयोग ने इस बाबत कोई फैसला नहीं किया है।
दीक्षित ने कहा कि दिल्ली में चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण वे चाहकर भी सस्ते प्याज के स्टॉल नहीं लगा सकती हैं। लेकिन यदि आम लोगों के हित में चुनाव आयोग थोड़ी राहत दे तो वह इसके लिए तत्काल कदम उठा सकती हैं।
वहीं थोक कीमतों पर अंकुश लगाने संबंधी शीला के सुझाव को पवार ने भी ठुकरा दिया है। पवार का कहना है कि भारी बरसात से फसल तो खराब हुई ही है। साथ ही निकासी में भी एक महीने की देरी हो गयी है। उत्पादक मंडियों में कमजोर आवक से कीमतें ऊंची हैं। इसका असर खुदरा कीमतों पर पड़ रहा है।
पवार ने कहा कि देश में इस बार प्याज की बुआई ज्यादा क्षेत्र में हैं। साथ ही इस बार उत्पादन में कमी आने की आशंका नहीं है। ऐसे में अगले दो से तीन हफ्ते में महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान से नई खेप आने के बाद कीमतों में कमी आनी शुरू हो जाएगी।
हालांकि वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा कृषि मंत्री के तर्क से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि देश में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता है। इसके बावजूद जमाखोरों की सक्रियता से प्याज की कीमतें बढ़ रही हैं।
पवार ने नासिक का उदाहरण देकर यह भी जता दिया कि कीमतों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। उनका कहना है कि मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि जब किसान को नासिक में एक किलोग्राम का 45 रुपये दाम मिल रहा है, तो वह प्याज यहां आकर 90 रुपये कैसे बिक रहा है। उन्होंने कहा कि न तो सरकार प्याज बेचती है और नहीं खरीदती है, ऐसे में कीमतों पर उसका कोई नियंत्रण नही है।