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ये कैसा प्रचार, कांग्रेस प्रत्याशी को जिताएं कमल का बटन दबाकर!

Wed, 09 Apr 2014 08:06 AM IST
Updated Wed, 09 Apr 2014 08:06 AM IST
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congress candidate karuna shukla election campaign painting begging votes for bjp

चुनावी सरगर्मी है या प्रचार का दबाव। नेताजी ने पार्टी बदल दी, लेकिन कार्यकर्ता पुराने निशान पर ही वोट मांग रहे हैं। कार्यकर्ताओं की लापरवाही नेताजी को भी महंगी पड़ सकती है।

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला कांग्रेस में शामिल हो चुकी हैं। वे छत्तीसगढ़ की बिलासपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस की प्रत्याशी भी हैं। लेकिन अब भी कमल छाप बटन दबाकर उन्हें जिताने की अपील की जा रही है।
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दरअसल, बिलासपुर में दीवार पर एक चुनावी इश्तहार बनाया गया है। जिस पर लिखा है, 'बिलासपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी करुणा दीदी को कमल छाप पर बटन दबाकर विजयी बनाएं।'

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करुणा के न‌िशाने पर रहे हैं मोदी

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छत्‍तीसगढ़ में भाजपा की कद्दावर नेताओं में रहीं करुणा शुक्ला फरवरी में कांग्रेस में शामिल हो गईं।

कांग्रेस में शामिल होते समय उन्होंने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि जिसने अपना पति धर्म नहीं निभाया हो, वह राष्ट्र धर्म क्या निभाएगा।

करुणा शुक्ला भाजपा की विधायक और सांसद रह चुकी हैं। वे भाजपा की महिला इकाई की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। कभी भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहीं करुणा शुक्ला ने पिछले साल पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।

रमन से थी करुणा की नाराजगी

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करुणा शुक्ला ने भाजपा छोड़ने की वजह पार्टी में हुई अवहेलना को बताया था और कहा था कि छत्तीसगढ़ में भाजपा दो-तीन सत्ताधारी नेताओं की जागीर बन कर रह गई है जिनमें राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह प्रमुख हैं।

करुणा शुक्ला ने कहा था कि छत्तीसगढ़ बीजेपी ने मुझे मानसिक रूप से काफी परेशान कर रखा था, इसी कारण से मुझे बीजेपी से इस्तीफा देना पड़ा।

हालांकि छत्‍तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान जब उनसे पूछा गया था कि क्या वह कभी कांग्रेस में शामिल होंगी, उन्होंने कहा था कि वह ऐसा कभी नहीं करेगी।

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