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मोदी सरकार की नाक के नीचे से विदेश गया 6172 करोड़ काला धन

Sat, 10 Oct 2015 05:55 PM IST
Updated Sat, 10 Oct 2015 05:55 PM IST
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Congress blames Modi govt for sending black money to Hongkong

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में वित्त मंत्रालय के नियंत्रण में चलने वाले एक सरकारी बैंक की मिलीभगत से 6172 करोड़ रुपये का काला धन देश के बाहर भेजा गया है।

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पार्टी ने कहा कि यह घोटाला कालाधन छिपाने वाले देश मारीशस या स्विट्जरलैंड में नही बल्कि देश की राजधानी दिल्ली की बैंक ऑफ बड़ोदा की शाखा में हुआ है। पार्टी प्रवक्ता आरपीएन सिंह ने कहा कि यह भ्रष्टाचार जुलाई 2014 से अगस्त 2015 के बीच हुआ है।
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भारत सरकार के एक बैंक ने तय मानकों का माखौल उड़ाया। सिंह ने कहा कि बैंकों के लिए रुपये जमा करने और निकालने के लिए नियम तय है। नियमों के अनुसार बैंकों को 50,000 रुपये से अधिक रकम जमा करने वाले व्यक्ति या संस्था के पैन कार्ड की जांच करना जरूरी है।
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साथ ही खाताधारक के लिए केवाईसी यानी उपभोक्ता को जाने जैसी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। पार्टी प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि इन नियमों के बावजूद काल्पनिक और फर्जी कंपनियों ने 6172 करोड़ रुपये बैंक में कैसे जमा करा दिए।

मोदी सरकार करवाए जांच

Congress blames Modi govt for sending black money to Hongkong

पार्टी ने इस मुद्दे पर स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच करवाने की मांग करते हुए मोदी सरकार से जवाब मांगा है। आरपीएन सिंह ने कहा कि काजू, दालें और चावल खरीदने के नाम पर 6172 करोड़ रुपये भारत से बाहर तो भेजे गए, लेकिन आयात किसी चीज का नहीं हुआ।

पार्टी ने आरोप लगाया कि पैसा बैंक ऑफ बड़ोदा से हांगकांग भेजा गया, जहां इनमें से किसी चीज का उत्पादन नहीं होता है। यह पैसा नकद में बैंक ऑफ बड़ौदा के 59 बैंक खातों में जमा कराया गया।

पैसा हांगकांग की कुछ चुनिंदा कंपनियों को भेजा गया। सामान प्राप्त हुआ या नहीं इसकी कोई भी जानकारी नहीं ली गई। बैंक के अधिकारियों ने हांगकांग से आए सामान के कोई भी दस्तावेज भी नहीं मांगे। कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि 6000 करोड़ रुपये हांगकांग भेज दिए गए।

जब कंपनियों के पास पर्याप्त बैलेंस नहीं था, तब बैंक की पूंजी का प्रयोग किया गया। पार्टी ने दावा किया कि यह प्रमाणित हो गया है कि कुल 3 भारतीय कंपनियां हैं और बताए गए पते पर उनमें से कोई भी कंपनी मौजूद नहीं है।

बैंक की आंतरिक जांच में जब अनियिमतिता पाई गई तो सिर्फ एक बैंक मैनेजर और अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। पार्टी ने इसे लेकर मोदी सरकार से स्वतंत्र जांच करवाने की मांग की है।

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