सियासी खींचतान से फिर लगा सरकार के आर्थिक एजेंडे पर ग्रहण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विपक्ष से मेलजोल बढ़ाकर अपने आर्थिक एजेंडे की गाड़ी को सरपट दौड़ाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा परवान चढ़ती नहीं दिख रही है। मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के बीच चाय पर चर्चा से जो उम्मीदें जगी थीं, वे अब नेशनल हेराल्ड मामले के सियासी रंग ओढ़ लेने से धूमिल हो गई हैं।
अब वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), रियल इस्टेट सहित आर्थिक सुधारों से जुड़े आधा दर्जन बिलों के कानूनी जामा पहनने की संभावना बेहद कम है। नेशनल हेराल्ड मामले के कारण सरकार और कांग्रेस के संबंधों की गाड़ी पटरी पर चढ़ने से पहले ही उतर गई है। मंगलवार को तल्ख तेवर अपना चुकी कांग्रेस ने सरकार से दो-दो हाथ करने के संकेत दिए।
वहीं बदली परिस्थितियों में सरकार ने भी बिल पारित कराने के मोह से ऊपर उठ कर जवाबी पलटवार के सहारे कांग्रेस को सियासी बढ़त हासिल न करने देने का संदेश दे दिया। हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि सरकार शीतकालीन सत्र में इन बिलों पर एक बार फिर से कांग्रेस का मन टटोलेगी। दूसरी ओर कांग्रेस ने साफ संकेत दिया है कि फिलहाल उसके लिए सरकार के साथ मेलजोल बढ़ाना और इसे कायम रखना संभव नहीं है।
सरकार और कांग्रेस बातचीत बनते-बनते बिगड़ जाने के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक संबंध सुधारने के लिए सोनिया-मनमोहन को निमंत्रण देने के बाद पार्टी को उकसाने का सिलसिला सरकार की ओर से शुरू हुआ।
कांग्रेस बिल लटकाने का बहाना ढूंढ़ रही
सरकार सुब्रमण्यम स्वामी के जरिए दुर्भावना की राजनीति कर रही है। ऐसे में जबकि सरकार पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ हमलावर हो, तब मेलजोल की बात ही गौण हो जाती है।दूसरी तरफ सरकार का मानना है कि प्रधानमंत्री की पहल के बाद कांग्रेस जीएसटी सहित तमाम आर्थिक सुधारों से जुड़े बिल को लटकाने का बहाना ढूंढ़ रही थी।
सरकार के मंत्री के अनुसार इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस बातचीत के बाद पूर्व मंत्री शैलजा ने बिना वजह गुजरात के मंदिर में प्रवेश के दौरान जाति पूछे जाने का झूठा दावा किया। इसी तरह दलितों के खिलाफ टिप्पणी मामले में पुलिस रिपोर्ट में वीके सिंह को क्लीन चिट मिलने के बाद भी इसे सियासी मुद्दा बनाए रखा गया।
वित्त मंत्री अरुण जेटली के मुताबिक नेशनल हेराल्ड मामले में सरकार ने मामला दर्ज नहीं किया है। फिर यह मामला यूपीए सरकार के कार्यकाल में ही सामने आया था। ऐसे में जब इस पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए कांग्रेस नेताओं की व्यक्तिगत पेशी का आदेश जारी किया तो कांग्रेस इसमें सरकार की भूमिका तलाशने लगी।
उधर भाजपा सूत्रों ने बताया कि चूंकि कांग्रेस ने फिर से असहयोग का रास्ता अपना लिया है, इसलिए उसे सियासी बढ़त हासिल करने से रोकने के लिए पार्टी इन मामलों में पलटवार करती रहेगी।