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मोदी जासूसी मामले में कांग्रेस को उल्टा पड़ा दांव

Sun, 09 Mar 2014 11:37 PM IST
Updated Sun, 09 Mar 2014 11:37 PM IST
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Congress back off on modi snooping issue

चुनाव की संवेदनशीलता और दांव उल्टा पड़ने के अंदेशे से सहमी यूपीए सरकार ने नरेंद्र मोदी की कथित महिला साथी की जासूसी मामले की जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

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तीन महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ऐसे किसी अवकाश प्राप्त जज को नहीं तलाश पाई जो इस जांच के लिए गठित आयोग की अध्यक्षता कर सके।

मोदी के खिलाफ इस चुनावी पांसे के पलटने के डर से घिरी सरकार अब किसी जज को ढूंढने की कोशिश भी नहीं कर रही है। गौरतलब है कि तीन महीने में इस आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंप देनी थी।

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कांग्रेस का अंदेशा भाजपा बना लेगी मुद्दा

Congress back off on modi snooping issue

हालांकि चुनाव की घोषणा के बाद आयोग के लिए जज की नियुक्ति चुनाव आचार संहिता के तहत नहीं आएगी क्योंकि आयोग गठन के फैसले को तीन महीने पहले कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी थी।

लेकिन सरकार को अंदेशा है कि अब ऐसा करने से भाजपा इसे बड़ा मुद्दा बना देगी। हालांकि भाजपा पहले भी सरकार के इस फैसले को कांग्रेस और सरकार की बदले की कार्रवाई बताती रही है।

आयोग गठन के बाद गृह मंत्रालय ने कम से कम आधा दर्जन हाईकोर्ट के अवकाशप्राप्त जज को अध्यक्ष पद संभालने की पेशकश की। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ऐसा कोई जज इस काम के लिए तैयार नहीं हुआ जिस पर सरकार को पूरा भरोसा हो।

फ‌िलहाल मामला छेड़ने को तैयार नहीं कांग्रेस

Congress back off on modi snooping issue

सरकार के रणनीतिकारों ने गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को इस मामले में धीरे चलने का संकेत दे दिया था। अधिकारी के मुताबिक अब चुनावी मौसम में सरकार कोई जोखिम उठाने के मूड में नहीं है।

आरोप है कि गुजरात के पूर्व गृहराज्य मंत्री और उत्तर प्रदेश के भाजपा चुनाव प्रभारी अमित शाह ने मुख्यमंत्री मोदी के कहने पर गुजरात की एक महिला आर्किटेक्ट की जासूसी करवाई थी।

इसके लिए शाह ने राज्य प्रशासन और पुलिस का गैर कानूनी इस्तेमाल किया था। केंद्र ने इस आयोग के तहत अरुण जेटली और प्रेम कुमार धूमल के दो पुराने मामलों की जांच भी करवाने का ऐलान किया था।

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