संघ से नजदीकी को लेकर स्मृति ईरानी निशाने पर
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शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों की नियुक्ति को लेकर सवालों के घेरे में आईं केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी पर सियासी हमले शुरू हो गए हैं। ईरानी पर आरोप लगा है कि उन्होंने ऐसे व्यक्ति को नागपुर राष्ट्रीय तकनीक संस्थान का प्रमुख बना दिया, जिन्होंने खुद को संघ का कार्यकर्ता बताया था और ईरानी की तारीफ की थी।
इस मामले में कांग्रेस ने ईरानी की तीखी आलोचना की है। पार्टी ने कहा है कि मंत्री को चाटुकारिता नहीं, बल्कि योग्यता को बढ़ावा देना चाहिए। कांग्रेस ने ईरानी के खिलाफ साइबर जंग छेड़ दी है। उधर, स्मृति ईरानी ने इस पूरे मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। मानव संसाधन विकास मंत्री के तौर पर ईरानी के पांच महीने का कार्यकाल विवादों से भरा रहा है।
ईरानी ने मंत्रालय का कार्यभार तब संभाला जब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और दिल्ली विश्वविद्यालय के बीच चार साल के पाठ्यक्रम को लेकर विवाद चल रहा था।
संघ नेताओं से दफ्तर में मिलने पर विवाद
मोदी सरकार के सत्ता में आने पर यूजीसी ने पलटी मारते हुए विश्वविद्यालय को चार साल का पाठ्यक्रम खत्म करने को कह दिया, जबकि यूपीए सरकार के समय उसने इसका विरोध नहीं किया था।
तब ईरानी पर इस मामले को कांग्रेस बनाम भाजपा के तौर पर देखने के आरोप लगे थे। इसके बाद ईरानी तब विवादों में घिरीं जब यूजीसी ने अपने अधिकार क्षेत्र को पार करते हुए आईआईटी को उनके अधीन होने का आदेश दे दिया।
संघ नेताओं से दफ्तर में मिलने पर विवाद
-स्मृति ईरानी पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नेताओं से अपने दफ्तर में मिली थीं। इस बात पर भी जमकर विवाद हुआ। विपक्षी पार्टियों का आरोप था कि संघ के नेता स्कूली किताबों में भगवा एजेंडा लागू कराने के लिए मंत्री से मिले थे।
आईआईटी में अलग कैंटीन पर विवाद
हाल में ही आईआईटी संस्थानों में शाकाहारी छात्रों के लिए अलग कैंटीन का मामला गरमाया था। मानव संसाधन विकास मंत्रालय पर आरोप लगा था कि उसने संघ के दबाव में आकर आईआईटी संस्थानों को अलग कैंटीन बनाने के लिए कहा है। हालांकि बाद में मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया था कि उसकी ओर से ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया है।