आडवाणी के कंधे पर बंदूक रखकर कांग्रेस का मोदी पर हमला
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लोकसभा चुनाव के ऐलान के बाद कांग्रेस अपने दस सालों के कामों को ही नहीं बल्कि सांप्रदायिक बनाम धर्मनिरपेक्ष शक्तियों की जंग को प्रमुख मुद्दा बना रही है।
चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद पार्टी वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के सहारे नरेंद्र मोदी पर निशाना साधती दिखी। पार्टी ने कहा कि आडवाणी ने सच ही कहा है कि भाजपा पर सिर्फ एक व्यक्ति का कब्जा हो गया है, जबकि कांग्रेस लोकतांत्रिक पार्टी है।
कांग्रेस को अभी भी उम्मीद
सभी धर्म और समुदाय को साथ लेकर चलती है। लोकसभा चुनाव के फाइनल को राहुल बनाम मोदी की जंग पार्टी मानने के लिए तैयार नहीं है। साथ ही कांग्रेस ने माना है कि महंगाई और भ्रष्टाचार को लेकर जनता में गुस्सा है।
कांग्रेस को पता है कि 2009 के मुकाबले 2014 के चुनाव उसके लिए काफी मुश्किल है। मगर पार्टी उम्मीद जता रही है कि भाजपा की देश के आधे राज्यों में कोई मौजूदगी नहीं है, जबकि देश के लगभग सभी राज्यों में कांग्रेस मौजूद है।
कैसे हासिल होगी 272 सीटें
कांग्रेस प्रवक्ता संजय झा कहते है कि भाजपा 272 से ज्यादा सीटें पाने का सपना देख रही है। जो कि कभी पूरा नहीं हो सकता है। राष्ट्रीय पार्टी होने के बावजूद आधे भारत में उसका कोई वजूद नहीं है। यही नहीं उसके सहयोगी दलों की भी इन राज्यों में कोई हैसियत नहीं है।
जबकि कांग्रेस असल में एक राष्ट्रीय पार्टी है। कांग्रेस सांप्रदायिकता और भाजपा पर सिर्फ एक व्यक्ति के कब्जे की बात की आधार पर अपना चुनावी एजेंडा बना रही है। बुधवार को कांग्रेस के नेता लालकृष्ण आडवाणी की उस पुरानी चिट्ठी का जिक्र करते दिखे।
'भाजपा पर निजी स्वार्थ हावी'
जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा पर निजी स्वार्थ हावी हो गया है। कांग्रेस प्रवक्ता राज बब्बर ने कहा कि भाजपा व्यक्तिवाद की राजनीति करती है। जबकि कांग्रेस सबको साथ लेकर चलती है।
हरियाणा के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर कहते है कि भाजपा सांप्रदायिक तनाव फैलाने में विश्वास करती है। जबकि कांग्रेस सौहार्द बढ़ाने का काम करती है। जनता यह अंतर खूब जानती है।