जाति पर भाजपा का पलटवार, 'नेहरू' से 'गांधी' कैसे हो गए?
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लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में मतदाताओं को लुभाने के लिए भाजपा भी नरेंद्र मोदी की जाति के विवाद को हवा देने में लगी हुई है।
मोदी की जाति पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि उसे यह भी बताना चाहिए कि नेहरू परिवार के लोगों की जाति गांधी कैसे हो गई। पार्टी ने कहा कि यदि भाजपा ने भी जाति को लेकर मुंह खोला तो बात दूर तलक तक जाएगी।
पिछड़ी जाति के मतदाताओं पर नजर
लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण की 41 सीटों में से 18 सीटें उत्तर प्रदेश और छह सीटें बिहार में हैं। इन सभी क्षेत्रों में पिछड़ी जाति के मतदाताओं की भारी संख्या है। इसलिए पहले से मोदी की जाति का उल्लेख कर रही भाजपा अब कांग्रेस के उठाए मुद्दे को तूल देने में जुटी है।
पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि मोदी की जाति पर उंगली उठा रही कांग्रेस को बताना चाहिए कि नेहरू परिवार के लोगों की जाति गांधी कैसे हो गई। कांग्रेस नेताओं को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले मथाई व कृष्ण मेनन की लिखी किताबें भी पढ़नी चाहिए।
बसपा भी कूदी लड़ाई में
त्रिवेदी ने कहा कि भ्रष्टाचार और महंगाई पर जवाब देने में नाकाम कांग्रेस चुनाव के असली मुद्दों से जनता का ध्यान बंटाने के लिए इस तरह के मुद्दे उठा रही है। उन्होंने कहा कि जाति का मुद्दा सबसे पहले बसपा प्रमुख मायावती के उठाया।
यह वही बसपा है जो कभी ‘तिलक, तराजू और तलवार’ जैसे नारे लगाती थी। कांग्रेस अब बसपा के सुर में सुर मिला रही है। कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए त्रिवेदी ने दोहराया कि मोदी गुजरात की मोढ घांची सुमदाय से हैं।
जाति को लेकर छिड़ी जंग
जिसे कांग्रेस के मुख्यमंत्री छबीलदास मेहता के कार्यकाल में जारी ओबीसी की सूची में शामिल किया गया। इसे लेकर 25 जुलाई 1994 को अधिसूचना जारी की गई थी। मोदी की जाति का मुद्दा उठा रहे शक्ति सिंह गोहिल भी उस सरकार में मंत्री थे।
फिलहाल कांग्रेस इस पूरे मुद्दे को इतनी आसानी से हाथ से नहीं निकालना चाहती है। वो तथ्यों को सामने रखकर मोदी पर निशाना साध रही है। अब देखना है कि आखिरी दौर के चुनाव में ये हथियार कांग्रेस कितना कारगर है।