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जयराम रमेश ने माना, एक जंग हार चुकी है कांग्रेस

Fri, 04 Apr 2014 05:30 PM IST
Updated Fri, 04 Apr 2014 05:30 PM IST
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'cong lost perception battle, leadership not communicative'

केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने स्वीकार किया है कि 10 साल से सरकार में रहने के कारण पार्टी सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है।

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उन्होंने कहा कि शीर्ष नेतृत्व के जनता से संवाद स्थापित करने में विफल रहने के कारण वह पहले ही धारणा की जंग हार गई है। ऐसे में पार्टी के लिए चुनाव प्रचार एक चुनौती बन गई है।
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हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आगामी चुनाव में कांग्रेस को तीन अंकों में अच्छी सीटें हासिल होंगी।

कांग्रेस को रक्षात्मक होने की जरूरत नहीं

'cong lost perception battle, leadership not communicative'

रमेश ने कहा कि न्यायपालिका, कैग जैसी संवैधानिक संस्थाओं और मीडिया की अत्यधिक सक्रियता और गैरजिम्मेदार जन संगठनों के कारण कांग्रेस के खिलाफ धारणा बनी।

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही पार्टी की प्रतिक्रिया धीमी रही। पार्टी ने प्रभावी तरीके से जनता को अपने नजरिये से अवगत नहीं करवाया। राजनीति पूरी तरह से संवाद है। इस कारण पार्टी धारणा की जंग हार गई और हमने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

हालांकि रमेश ने इस पर जोर दिया कि यूपीए-2 को अपने काम को लेकर रक्षात्मक होने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस चुनाव में अच्छी सीटों हासिल करेगी।

कांग्रेस से खफा निशक्त समूह

'cong lost perception battle, leadership not communicative'

देश के करोड़ों निशक्तजनों को निशक्त अधिकार विधेयक पेश करने की उम्मीद दिखाकर चुप्पी साधे कांग्रेस के खिलाफ निशक्त समूह ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस की इस वादा खिलाफी का खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।

सामाजिक कार्यकर्ता विकास शर्मा ने आरोप लगाया कि निशक्तों के मुद्दे पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने झूठे सपने दिखाए हैं। उन्होंने विधेयक को अध्यादेश के रूप में लाने का आश्वासन दिया था। लेकिन इसे अमली जामा नहीं पहनाया गया। इसका असर कांग्रेस को निशक्तों से मिलने वाले वोट पर हो सकता है।

उन्होंने कहा कि निशक्तजन उसी पार्टी को वोट देंगे, जिनके घोषणापत्र में उनके अधिकार और भागीदारी के मुद्दे को जगह मिलेगी। अगर बड़ी राष्ट्रीय पार्टियां ऐसा नहीं करेंगी तो निशक्तजन नोटा का इस्तेमाल करेंगे। फिलहाल भाजपा की चुनावी घोषणापत्र का इंतजार है। बताते चले कि देश में करीब पांच करोड़ निशक्त मतदाता हैं।

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