फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   conflict in bjp leaders

भाजपा में जारी है शह और मात का खेल

Sun, 26 May 2013 12:48 AM IST
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा Updated Sun, 26 May 2013 12:48 AM IST
विज्ञापन
conflict in bjp leaders

राजनाथ सिंह के अध्यक्ष चुने जाने के कई माह बीत जाने के बावजूद भाजपा नेतृत्व में राजनीतिक शह और मात का खेल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।

विज्ञापन


पार्टी अध्यक्ष के तौर पर नितिन गडकरी की दोबारा ताजपोशी के सख्त खिलाफ रहे वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी अब उन्हें चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपने की पैरवी कर रहे हैं।
विज्ञापन


हालांकि आडवाणी के इस प्रस्ताव से राजनाथ सिंह सहमत नहीं हैं और वे अब भी चुनाव अभियान समिति का जिम्मा नरेंद्र मोदी को सौंपने के पक्ष में हैं।

अब यह मामला आगामी 8 और 9 जून को गोवा में होने वाली भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी को भी गरमा सकता है।

इस सम्मेलन का आयोजन चुनाव का इंतजार कर रहे राज्यों के विधानसभा तथा आगामी लोकसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाने के लिए किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार आडवाणी ने राजनाथ सिंह से कहा है कि चुनाव अभियान समिति की कमान गडकरी को सौंप दी जाए।

आडवाणी के साथ अनंत कुमार समेत उनका पूरा खेमा भी गडकरी के पक्ष में उतर आया है। जबकि यह बात सभी जानते हैं कि गडकरी को दोबारा पार्टी अध्यक्ष बनने से रोकने में इसी खेमे का हाथ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसलिए भाजपा में भी माना जा रहा है कि आडवाणी की यह मुहिम नरेंद्र मोदी के दिल्ली की ओर बढ़ते कदमों को रोकने का प्रयास भर है।

दरअसल, राजनाथ सिंह के अध्यक्ष बनने के बाद मोदी अब पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था संसदीय बोर्ड में शामिल हो चुके हैं और इधर राजनाथ सिंह और मोदी की जोड़ी भाजपा में ताकतवर बन कर उभरी है। जबकि गडकरी पहले से ही राजनाथ सिंह के साथ रहे हैं। मगर अभी अपना राजनीतिक पुनर्वास नहीं होने से पार्टी नेतृत्व से कुछ नाराज चल रहे हैं।


भाजपा नेता भी मानते हैं कि आडवाणी खेमा यह नया दांव फेंककर मोदी की राह रोकना चाहता है। इससे मोदी और गडकरी के बीच नया विवाद भी शुरू होने की पूरी संभावना है।

दूसरी ओर राजनाथ सिंह विवादों से जूझ रहे गडकरी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने से कतरा रहे हैं। वे यह जिम्मेदारी मोदी को देने का मन बना चुके हैं। इसलिए साफ है कि गोवा सम्मेलन में अब यह विवाद तूल भी पकड़ सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed