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सिर पर मैला ढोने से निजात पाने के लिए सम्मेलन
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jan 2013 12:16 AM IST
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राज्य सरकारों के ढुलमुल रवैये से नाराज सिर पर मैला ढोने वाले लोग अब केंद्र सरकार से गुहार लगाएंगे। इस शर्मनाक प्रथा से छुटकारे के लिए हजारों लोग दिल्ली आकर 31 जनवरी को सम्मेलन करने जा रहे हैं। सम्मेलन का उद्देश्य इस पेशे से छुटकारा दिलाने के लिए सरकार की ओर से तत्काल उचित कदम उठाने के लिए दबाव बनाना है। राष्ट्रीय गरिमा अभियान के बैनर तले होने वाले इस सम्मेलन में 20 राज्यों से वे महिलाएं भी आ रही हैं। जिन्होंने हाल में इस कुप्रथा से अपना नाता तोड़ लिया है।
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अभियान के संयोजक आसिफ शेख के मुताबिक अब तक देश भर की लगभग पांच हजार से ज्यादा महिलाएं इस पेशे को छोड़ चुकी हैं। लेकिन इस शर्मनाक काम को छोड़ने के बाद उनके सामने रोजगार का संकट है। हालांकि कई राज्य सरकारें यह दावा करती हैं कि इस कुप्रथा से बाहर निकलने वाले लोगों के पुनर्वास और रोजगार की योजना चलाई जा रही है। इसके बावजूद स्थिति यह है कि काम न मिलने की मजबूरी के चलते अभी भी हजारों महिलाएं इस शर्मनाक काम को करने के लिए मजबूर हैं। अब केंद्र सरकार को ही इसके लिए ठोस पहल करनी होगी।
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हालांकि ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश का कहना है कि यह समाज की जिम्मेदारी है कि वह इस शर्मनाक प्रथा को समाप्त करने के लिए आगे आए। केंद्र व राज्य सरकारों की योजना मात्र से सिर पर मैला ढोने का काम बंद नहीं होगा क्योंकि यह काम अभी भी जाति से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि स्वच्छता एवं पेयजल मंत्रालय की ओर से निर्मल भारत अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत सिर पर मैला ढोने की प्रथा को समाप्त करने और खुले शौच पर पाबंदी लगाने के लिए घरों में शौचालय निर्माण के लिए केंद्र सरकार दस हजार रुपये का योगदान कर रही है। लेकिन डेढ़ दशकों से चल रही योजना के बावजूद अभी तक कामयाबी नहीं मिली है।
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स्वयंसेवी संस्था सफाई कर्मचारी आंदोलन के मुखिया विलसन विजवासन के मुताबिक राज्यों में सिर पर मैला ढोने की प्रथा जारी है। लगभग तीन लाख लोग जिसमें सर्वाधिक महिलाएं हैं, इस काम को करने को मजबूर हैं। खास बात यह है कि राज्य सरकारों ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर इससे इंकार किया है। लेकिन पिछले वर्ष एक सर्वेक्षण में उत्तर भारत में सात हजार से ज्यादा लोग इस काम को कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 5938, बिहार में 995, उत्तराखंड में 242, राजस्थान में 806, जम्मू-कश्मीर में 170, पंजाब में 13, हिमाचल में 28 और मध्य प्रदेश में 425 लोग सिर पर मैला ढोने के काम को करते हुए पाए गए।